घर छोड़ शिविरों में सर्द रातें गुजार रहे हैं सीमांत ग्रामीण
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को भले ही गोलाबारी नहीं की गई हो, लेकिन सीमावर्ती ग्रामीण अभी शिविरों में ही हैं। कुछ लोग दिन में गांवों में पहुंचे थे, लेकिन शाम को उन्हें भी सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा दिया गया।
वहीं, जिला प्रशासन ने सरहद पर दो किलोमीटर की सीमा पट्टी पर धारा 144 लागू कर दी है ताकि एक से अधिक लोग सीमावर्ती गांवों में एकत्रित नहीं हो सकें और गोलाबारी में अधिक नुकसान नहीं उठाना पड़े।प्रशासन और सुरक्षा बल के अधिकारी ग्रामीणों को गांवों में नहीं रुकने को कह रहे हैं।
सीमावर्ती गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। शाम को ग्रामीण राहत शिविरों की ओर रुख कर लेते हैं। सुबह वह घरों को लौट जाते हैं, क्योंकि मवेशियों को चारा डालना होता है।
राहत शिविरों में गुजारनी पड़ रही है सर्द रातें
सीमावर्ती ग्रामीणों के अनुसार की घरों में सब सुख सुविधा है। सर्दी शुरू हो गई है, लेकिन उन्हेें राहत शिविरों में रात गुजारनी पड़ रही है। तारो, संतोष, पोली, वीना, पिंकी आदि ने बताया कि मंगलवार की सुबह पाकिस्तान गोलाबारी ने रामगढ़ सेक्टर में तबाही मचाई थी।
रामगढ़ सेक्टर में सीमा से बेहद करीब नंगा, जस्सो चक, सांगदू, कमोर, चक बबराल, रंगूर कैंप, दग, अवताल, गोविंदगढ़ आदि गांवों के लोग विस्थापित होकर रामगढ़ के गुरुद्वारों, सामुदायिक केंद्रों, राधा स्वामी सत्संग आश्रम ठंडी खुई, सरकारी स्कूलों समेत रिश्तेदारों के यहां ठहरे हैं।
अशोक चौधरी, दर्शन लाल, हरजिंदर कुमार, प्यारा राम, आदि ने कहा कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। अब पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की मांग की है।
न मजदूर मिल रहे और न खुद जा पा रहे खेतों पर
सुच्चार सिंह, बलकार सिंह, सोहन लाल, राजेश चौधरी आदि ने कहा कि सीमा के नजदीक सैकड़ों एकड़ में धान की फसल खड़ी है। फसल खेतों में ही बर्बाद हो रही है। सुरक्षा बल उन्हें खेतों पर जाने नहीं रहे हैं। जंगली जानवर भी फसल खराब कर रहे हैं। सरकार की ओर से किसानों को कोई मदद नहीं दी जाती है।