फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   border area villagers forced to spent winter nights in camps

घर छोड़ शिविरों में सर्द रातें गुजार रहे हैं सीमांत ग्रामीण

Thu, 03 Nov 2016 03:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 03 Nov 2016 03:05 PM IST
विज्ञापन
border area villagers forced to spent winter nights in camps
सीमांत ग्रामीणों को किया गया विस्थापित - फोटो : File Photo

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को भले ही गोलाबारी नहीं की गई हो, लेकिन सीमावर्ती ग्रामीण अभी शिविरों में ही हैं। कुछ लोग दिन में गांवों में पहुंचे थे, लेकिन शाम को उन्हें भी सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा दिया गया।

विज्ञापन


वहीं, जिला प्रशासन ने सरहद पर दो किलोमीटर की सीमा पट्टी पर धारा 144 लागू कर दी है ताकि एक से अधिक लोग सीमावर्ती गांवों में एकत्रित नहीं हो सकें और गोलाबारी में अधिक नुकसान नहीं उठाना पड़े।प्रशासन और सुरक्षा बल के अधिकारी ग्रामीणों को गांवों में नहीं रुकने को कह रहे हैं।
विज्ञापन


सीमावर्ती गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। शाम को ग्रामीण राहत शिविरों की ओर रुख कर लेते हैं। सुबह वह घरों को लौट जाते हैं, क्योंकि मवेशियों को चारा डालना होता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

राहत शिविरों में गुजारनी पड़ रही है सर्द रातें

border area villagers forced to spent winter nights in camps
सीमांत ग्रामीणों को किया गया विस्थापित - फोटो : GETTY IMAGES

सीमावर्ती ग्रामीणों के अनुसार की घरों में सब सुख सुविधा है। सर्दी शुरू हो गई है, लेकिन उन्हेें राहत शिविरों में रात गुजारनी पड़ रही है। तारो, संतोष, पोली, वीना, पिंकी आदि ने बताया कि मंगलवार की सुबह पाकिस्तान गोलाबारी ने रामगढ़ सेक्टर में तबाही मचाई थी।  

रामगढ़ सेक्टर में सीमा से बेहद करीब नंगा, जस्सो चक, सांगदू, कमोर, चक बबराल, रंगूर कैंप, दग, अवताल, गोविंदगढ़ आदि गांवों के लोग विस्थापित होकर रामगढ़ के गुरुद्वारों, सामुदायिक केंद्रों, राधा स्वामी सत्संग आश्रम ठंडी खुई, सरकारी स्कूलों समेत रिश्तेदारों के यहां ठहरे हैं।

अशोक चौधरी, दर्शन लाल, हरजिंदर कुमार, प्यारा राम, आदि ने कहा कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। अब पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की मांग की है। 

न मजदूर मिल रहे और न खुद जा पा रहे खेतों पर

border area villagers forced to spent winter nights in camps
सैकड़ों एकड़ में धान की फसल खड़ी - फोटो : फाइल फोटो
खेतों में खड़ी फसल को लेकर सीमावर्ती किसान परेशान हैं। धान को काटने के लिए न तो वह खुद खेतों में जा पा रहे हैं और न ही उन्हें मजदूर मिल रहे हैं। इस बार अब तक क्षेत्र में कंपाइन मशीन भी नहीं आई है, जिससे धान की आसानी से कटाई कराई जा सके।

सुच्चार सिंह, बलकार सिंह, सोहन लाल, राजेश चौधरी आदि ने कहा कि सीमा के नजदीक सैकड़ों एकड़ में धान की फसल खड़ी है। फसल खेतों में ही बर्बाद हो रही है। सुरक्षा बल उन्हें खेतों पर जाने नहीं रहे हैं। जंगली जानवर भी फसल खराब कर रहे हैं। सरकार की ओर से किसानों को कोई मदद नहीं दी जाती है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed