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Jammu News: बलिदानी के परिवार ने किया ‘कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर’ का विमोचन
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किताब के विमोचन के दौरान सेवानिवृत्त मेजर जनरल रंजन महाजन व अन्य स्रोत - सेना
- राजपूताना राइफल्स के स्मरण दिवस पर किया गया मेजर जनरल रंजन महाजन की किताब का विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर घाटी में तैनात रहे जवानों के साहस, त्याग और बलिदान को सामने लाने वाली किताब ‘कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर’ का विमोचन सेवानिवृत्त मेजर जनरल रंजन महाजन ने बुधवार को किया। यह कार्यक्रम कृतज्ञता समारोह के रूप में आयोजित किया गया, जहां कठिन हालात में देश की सेवा करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम राजपूताना राइफल्स के स्मरण दिवस के अवसर पर हुआ। किताब का विमोचन बलिदानी नायक नीरज कुमार सिंह की वीर नारी और उनके दो बेटों के हाथों कराया गया। नीरज कुमार सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। अपनी किताब में मेजर जनरल महाजन ने कश्मीर में अपनी पांच तैनातियों के दौरान देखे अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। किताब में केवल सैन्य अभियानों का ही वर्णन नहीं है, बल्कि जवानों के बीच का भाईचारा, उनका हौसला, परिवार से दूर रहने का दर्द और हर दिन मौत से सामना करने जैसी भावनाएं भी साफ झलकती हैं।
बता दें कि रंजन महाजन को 1987 में राजपुताना राइफल्स की 4 बटालियन में नियुक्त किया गया था। उन्होंने देश के अलग अलग हिस्सों में करीब 35 वर्षों तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स की एक बटालियन, नियंत्रण रेखा पर एक पैदल ब्रिगेड और पश्चिमी सीमा पर एक डिवीजन की कमान भी संभाली। उन्हें सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर घाटी में तैनात रहे जवानों के साहस, त्याग और बलिदान को सामने लाने वाली किताब ‘कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर’ का विमोचन सेवानिवृत्त मेजर जनरल रंजन महाजन ने बुधवार को किया। यह कार्यक्रम कृतज्ञता समारोह के रूप में आयोजित किया गया, जहां कठिन हालात में देश की सेवा करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम राजपूताना राइफल्स के स्मरण दिवस के अवसर पर हुआ। किताब का विमोचन बलिदानी नायक नीरज कुमार सिंह की वीर नारी और उनके दो बेटों के हाथों कराया गया। नीरज कुमार सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। अपनी किताब में मेजर जनरल महाजन ने कश्मीर में अपनी पांच तैनातियों के दौरान देखे अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। किताब में केवल सैन्य अभियानों का ही वर्णन नहीं है, बल्कि जवानों के बीच का भाईचारा, उनका हौसला, परिवार से दूर रहने का दर्द और हर दिन मौत से सामना करने जैसी भावनाएं भी साफ झलकती हैं।
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बता दें कि रंजन महाजन को 1987 में राजपुताना राइफल्स की 4 बटालियन में नियुक्त किया गया था। उन्होंने देश के अलग अलग हिस्सों में करीब 35 वर्षों तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स की एक बटालियन, नियंत्रण रेखा पर एक पैदल ब्रिगेड और पश्चिमी सीमा पर एक डिवीजन की कमान भी संभाली। उन्हें सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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