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सरकारी अस्पतालों में खून के लिए जद्दोजहद
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 15 Feb 2015 07:46 PM IST
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सरकारी अस्पतालों में खून के लिए जद्दोजहद जारी है। तीमारदारों को अपने मरीजों को खून देने के लिए भारी कसरत करनी पड़ती है। राज्य में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए नए अस्पतालों के निर्माणों पर तो जोर दिया गया, मगर ब्लड बैंकों पर कुछ खास नहीं हो पाया है। एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, कार्डियोलाजी, सीटीवीएस सहित कई महत्वपूर्ण यूनिट हैं।
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यहां रोजाना कई सर्जरी भी हो रही हैं। डायलेसिस में भी मरीजों को रोजाना खून की जरूरत पड़ती है। लेकिन अभी तक अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने के लिए कुछ खास नहीं हो पाया है। अस्पताल में ब्लड स्टोरेज सेंटर में कुछ यूनिट खून रिजर्व रहता है। जिसमें अधिकांश मामलों में तीमारदारों को जीएमसी या एसएमजीएस अस्पताल से खून लाना पड़ता है। यही हाल अस्पताल सरवाल का है।
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नेगेटिव ब्लड के लिए माथापच्ची
सरकारी अस्पतालों में खासकर नेगेटिव ब्लड के लिए तीमारदारों और मरीजों की माथापच्ची जारी है। अमूमन ऐसे मामलों में तीमारदारों को परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों से खून लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। सड़क हादसों या अन्य घटनाओं के दौरान अस्पताल पहुंचने वाले नेगेटिव ब्लड ग्रुप को खून मिलना काफी मुश्किल रहता है। शहर के सबसे बड़े जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में ही कुछ यूनिट नेगेटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रहता है।
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