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लद्दाख: कारगिल परिषद में भाजपा ने नेकां से वापस लिया समर्थन, उपायुक्त से परिषद भंग करने की मांग

Thu, 31 Mar 2022 02:25 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 31 Mar 2022 02:25 AM IST
सार

कारगिल जिले में स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद में भाजपा और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन टूट गया है। भाजपा के पार्षदों ने उपायुक्त और परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी से परिषद को भंग करने की मांग की है।

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BJP withdraws support from NC in Kargil Parishad, demands from Deputy Commissioner to dissolve the council
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लद्दाख के कारगिल जिले में स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद में भाजपा और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन टूट गया है। भाजपा के सात पार्षदों ने कारगिल के जिला उपायुक्त और परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजकर तत्काल प्रभावी से समर्थन वापसी की सूचना देकर परिषद को भंग करने की मांग की है। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि कारगिल परिषद प्रशासन जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करने के बजाय सियासी एजेंडे पर चल रहा है। ऐसे में वह अपना समर्थन जारी नहीं रख सकते। 

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लद्दाख भाजपा में सचिव नीलजा अंगमो हशुर की ओर से दी जानकारी

लद्दाख भाजपा में सचिव नीलजा अंगमो हशुर की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार भाजपा के सात पार्षदों में शामिल मोहसिन अली, स्टैंजिन लकपा, मोहम्मद अली, पदमा दोरजे, लीला बानो, स्टैंजिन चोसग्याल और जैनब बी ने परिषद में अव्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

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कारगिल परिषद सांविधानिक जिम्मेदारियां नहीं निभा रही: भाजपा

लद्दाख भाजपा के अध्यक्ष के साथ बैठक का हवाला देकर पार्टी ने कहा है कि कारगिल परिषद सांविधानिक जिम्मेदारियां नहीं निभा रही है। विकास राशि को पारदर्शिता के साथ खर्च नहीं किया जा रहा। यह भी आरोप लगाया कि नेशनल कांफ्रेंस अपना सियासी एजेंडा चला रही है, जिससे काम प्रभावित हो रहे हैं। लिहाजा इसे भंग किया जाना चाहिए।

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2018 में हुए थे चुनाव, एक वर्ष का कार्यकाल बाकी

कारगिल परिषद के चुनाव वर्ष 2018 में हुए थे। परिषद का कार्यकाल पांच साल का होता है। इस लिहाज से मौजूदा परिषद का कार्यकाल अभी एक वर्ष शेष है। 

आरोप बेबुनियाद, यह सिर्फ दबाव की राजनीति : फिरोज

कारगिल परिषद के अध्यक्ष फिरोज अहमद खान ने कहा कि भाजपा के सात तीन निर्वाचित और चार नामांकित पार्षदों ने जिला उपायुक्त को समर्थन वापसी पत्र भेजा है। इसमें लगाए गए आरोप आधारहीन हैं। असल में यह दबाव बनाने की राजनीति है। उन्होंने कहा कि 26 निर्वाचित और चार नामांकित सदस्यों वाली परिषद में नेकां के 14 पार्षद हैं, जिसे चार निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है। भाजपा के पत्र पर जिला उपायुक्त क्या कदम उठाते हैं, यह उन पर निर्भर करता है। 

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