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अलगाववाद कुचलने को भाजपा की गुगली

Mon, 02 Mar 2015 12:29 PM IST
Updated Mon, 02 Mar 2015 12:29 PM IST
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bjp strategy to crush separatism

रियासत में सरकार का हिस्सा बनने का भाजपा ने अकारण ही फैसला नहीं लिया है। इसके गहरे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सत्ता के बहाने अलगाववाद के फन को कुचलने की गुगली चाल। यही वजह है कि पार्टी ने तमाम विरोधों के बाद भी अलगाववादी रहे सज्जाद लोन को मौका दिया।

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साथ ही आतंकियों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने का अभियान चलाने वाले दो विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह दिलाई। जोरावार सिंह सभागार में शपथ ग्रहण समारोह के बाद सत्ता के गलियारे में मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाएं आम हो गईं। राजनीतिक पंडित गठजोड़ के संभावित परिणामों पर चर्चा करने लगे।
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कहा गया कि अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन के बेटे तथा हंदवाड़ा से पीपुल्स कांफ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन को भाजपा ने चुनाव से पहले ही मुख्य धारा में शामिल करने की रणनीति बना ली थी। इसी के तहत मोदी से उनकी मुलाकात कराई गई। मंत्रिमंडल में शामिल करने पर पीडीपी की आपत्ति के बाद भी उन्हें जगह दिया गया।

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मुस्लिम विरोधी धब्बा धोने का प्रयास

bjp strategy to crush separatism

भाजपा की रणनीति यह है कि अलगाववादियों में यह संदेश दिया जाए कि वे इस रास्ता को छोड़कर मुख्य धारा में लौटें तथा रियासत एवं देश के विकास में योगदान दें। आतंकवाद प्रभावित हंदवाड़ा तथा आस-पास के इलाके में लोन का काफी प्रभाव है।

इसके साथ ही रामबन से विधायक बाली भगत तथा मुस्लिम बहुल किश्तवाड़ विधानसभा से पहली बार चुने गए सुनील शर्मा दोनों ही आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के साथ मिलकर लोगों को जागरूक करने की मुहिम चलाए हुए हैं।

इन्हें मंत्रिमंडल में स्थान देकर यह जताने की कोशिश की गई है कि जब जनप्रतिनिधि आतंक के खिलाफ खड़ा हो सकता है तो आम जन भी इस मुहिम में साथ क्यों नहीं हो सकते।

राजनीतिक पंडित यह भी मानते हैं कि यह पहला मौका है जब भाजपा सरकार का हिस्सा बनकर मुस्लिम विरोधी होने के धब्बे को धोने में सफल रहेगी। हालांकि, विपक्ष इसे भाजपा की सत्ता के प्रति भूख बता रही है।

विपक्ष का मानना है कि भाजपा ने केवल सत्ता के लिए अपने मूल विचारों तथा सिद्धांतों से समझौता किया है। भगवा खेमा लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहा था।

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