{"_id":"20595f03524d0560890a1bde2444c5ca","slug":"bjp-should-ask-mufti-if-he-is-an-indian-rss-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘भाजपा मुफ्ती से पूछे, क्या वह भारतीय हैं’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘भाजपा मुफ्ती से पूछे, क्या वह भारतीय हैं’
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 08 Mar 2015 11:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संघ के मुखपत्र में छपे लेख में की गई है जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की तीखी आलोचना आरएसएस के मुखपत्र आर्गनाइजर में छपे एक लेख में भाजपा से कहा गया है कि वह जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद से पूछे कि वह भारतीय हैं या नहीं।
विज्ञापन
लेख के मुताबिक, पाकिस्तान और आतंकियों को राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए धन्यवाद देकर मुफ्ती दोहरे मापदंड नहीं अपना सकते क्योंकि शिकारी और खरगोश दोनों के साथ नहीं चल सकते। ‘स्पार्किंग कंट्रोवर्सी’ नामक यह लेख पूर्व सीबीआई निदेशक जोगिंदर सिंह ने लिखा है।
विज्ञापन
कश्मीर घाटी छोड़ने को मजबूर किए गए 3.70 लाख हिंदुओं और सिखों की दुर्दशा के लिए लेख में भारत सरकार की आलोचना भी की गई है। साथ ही कहा गया है कि इन लोगों के बारे में फैसला लेने के लिए सरकार के पास इच्छा शक्ति होनी जरूरी है।
विज्ञापन
उन्होंने सरकार से कहा है कि ऐसे लोगों के बारे में कुछ निर्णय करने के लिए ‘इच्छा शक्ति’ दिखाने की जरूरत है। सिंह ने कहा कि सईद ने शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव होने देने के लिए पाकिस्तान, अलगाववादी एवं आतंकवादियों को धन्यवाद दिया है।
उन्होंने लेख में कहा, ‘गठबंधन में भागीदार, भाजपा को पीडीपी नेता से यह स्पष्ट करने के लिए साफ शब्दों में कहना चाहिए कि क्या वह भारतीय हैं या नहीं। क्या वह भारत के वफादार हैं या नहीं। वह दोनों हाथों में लड्डू रखने की दोहरी नीति नहीं अपना सकते।’
कश्मीर घाटी से पलायन करने वाले हिन्दुओं और सिखों के अधिकारों का संरक्षण करने में ‘अकर्मण्यता’ दिखाने के लिए सरकार की आलोचना करते हुए सिंह ने कहा कि केंद्र ने उनके लिए तो कानी अंगुली भी नहीं उठायी।
उन्होंने 3.70 लाख हिन्दुओं एवं सिखों की चर्चा किये बिना कश्मीर को रियायत देना जारी रखने पर भी केन्द्र की आलोचना की।