भाजपा-पीडीपी में ठनी तो हाथ से जाएंगी विप की सीटें
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भाजपा और पीडीपी में तालमेल गड़बड़ाने से नेशनल कांफ्रेंस के दो प्रत्याशियों की जीत पक्की होती दिख रही है। नेकां और कांग्रेस को सियासी समीकरणों में इस बदलाव का आभास नहीं था इसलिए कांग्रेस ने एक भी प्रत्याशी खड़ा नहीं किया। यूपीए ने अधिक प्रत्याशी खड़े किए होते तो भाजपा -पीडीपी की मुश्किलें और बढ़ सकतीं थीं।
अब पीडीपी की ओर से भाजपा पर छठे प्रत्याशी के नामांकन वापसी को लेकर जोर डाला जा रहा है। लेकिन, भाजपा ने सकारात्मक संदेश नहीं दिया है। इस तनातनी से कश्मीर में भाजपा के एक प्रत्याशी की जीत मुश्किल हो गई है। इसी तरह जम्मू संभाग की एक सीट पर भाजपा के दो प्रत्याशियों के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है।
तालमेल फिर से कायम नहीं हुआ तो कश्मीर में पीडीपी और भाजपा के एक-एक प्रत्याशी खतरे में होंगे। चूंकि नेकां से सिर्फ दो प्रत्याशी हैं इसलिए कुल जमा दो सीटों का ही नुकसान होगा। विधान परिषद चुनाव में नामांकन की स्क्रूटनी के क्रम में जम्मू संभाग से निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह का नामांकन रद्द हो गया है।
कुल 14 नामांकन वैध पाए गए हैं। लेह से भाजपा के छेरिंग दोरजे और करगिल से पीडीपी के इनायत अली के मुकाबले कोई प्रत्याशी नहीं है। इसलिए दोनों निर्विरोध चुने जा सकते हैं। आधिकारिक घोषणा 21 फरवरी को होगी। इसी तरह विधान परिषद के तीन सदस्यों के विधानसभा चुनाव जीतने से खाली हुई सीटों पर पीडीपी के फिरदौस टाक और यासिर रेशी तथा भाजपा से सौफी यूसुफ भी निर्विरोध चुने जा रहे हैं।
उनके मुकाबले दूसरे दलों का कोई प्रत्याशी नहीं है। ये तीन सीटें देवेंद्र राणा, मोहम्मद अशरफ मीर और अब्दुल मजीद भट के विधायक बनने से खाली हुईं थीं। पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि भाजपा के छठे प्रत्याशी के नाम वापसी के लिए बातचीत चल रही है। तालमेल रहना दोनों पार्टियों के हक में है।
भाजपा के पैंतरे से गड़बड़ाया सियासी गणित
अब छह सीटों के लिए 2 मार्च को मतदान होंगे। कश्मीर की दो सीटों पर पीडीपी के जावेद मिर्चाल और सैफुद्दीन भट खड़े हैं। भाजपा ने द्राक्षा अंद्राबी को खड़ा कर तालमेल तोड़ा और मुकाबला मुश्किल बना दिया है। एक सीट पर नेकां ने कैसर जमशेद लोन को उम्मीदवार बनाया है। एक सीट पर जीत के लिए 29 वोट चाहिए।
भाजपा के पास 25 विधायक हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के दो और निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता को मिलाकर भाजपा के पास 28 वोट हैं। इस तरह अगर अंद्राबी का नामांकन वापस नहीं होता है तो जीत के लिए उन्हें कम से कम एक निर्दलीय विधायक के वोट का जुगाड़ करना पड़ेगा। राज्यसभा चुनाव के समीकरण कायम रहे तो नेकां और कांग्रेस के पास तीन निर्दलीयों के समर्थन के साथ 30 वोट हो सकते हैं।
इस तरह भाजपा और पीडीपी का एक-एक प्रत्याशी कश्मीर से हार सकता है। तीस वोटों के गणित से जम्मू संभाग की एक सीट पर नेकां के सज्जाद अहमद किचलू की जीत पक्की हो सकती है। तब जम्मू की तीन सीटों के लिए भाजपा और पीडीपी में ही मुकाबला रह जाएगा। इन सीटों के लिए भाजपा ने तीन और पीडीपी ने एक उम्मीदवार उतारे हैं।
जीत के लिए 18 वोट चाहिए। इस तरह एक-एक सीट पर भाजपा-पीडीपी की जीत पक्की है। भाजपा के पास सरप्लस वोट सिर्फ 10 बचते हैं। इस संख्या से भाजपा अपने दो प्रत्याशी नहीं जीता सकती। इसी तरह पीडीपी के पास 11 सरप्लस वोट बचेंगे और उसके दूसरे प्रत्याशी का भाग्य निर्दलीय पर निर्भर होगा।