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उद्घाटन के इंतजार में रेलवे स्टेशन पर धूल फांक रहे हैं बायो टॉयलेट

Fri, 17 Feb 2017 04:08 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 17 Feb 2017 04:08 PM IST
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BIO TOILETS ARE BECOMING USELESS ON JAMMU STATION
जम्मू स्टेशन - फोटो : File Photo

भारतीय रेलवे ने गंदगी भरे शौचालयों को त्याग करने के चलते बायो टायलेट को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन में स्थापित किया। इसे देश का दूसरे नंबर का बायो टायलेट युक्त रेलवे स्टेशन बनाने की दिशा में कदम भी माना गया।

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जम्मू में रेलवे ने दो बायो टायलेट सेट बनाए, ताकि देश भर से जम्मू में आने वाले सैलानियों को स्वच्छ शौचालय सुविधा का लाभ मिल सके, लेकिन इसे रेलवे विभाग की लापरवाही माना जाए या कुछ और कि अभी तक इन बायो टायलेट को शुरू ही नहीं किया जा सका। ऐसा न हो कि शुरू होने से पहले ही इन बायो टायलेट को जंग खा जाए। इन बायो टायलेट की स्थिति दिन-प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है।
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साल 2016 के मध्य में तैयार इन बायो टायलेट से स्वच्छ वातावरण की बात कही जा रही थी, इसके साथ ही स्मार्ट सिटी की राह में पहला कदम भी माना गया। रेलवे को उम्मीद थी कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये रेल मंत्री इसका शुभारंभ करेंगे, लेकिन आज तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका। अब इनकी स्थिति जर्जर होती जा रही है।

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एक सेट पर करीब 17 लाख रुपये का खर्च

BIO TOILETS ARE BECOMING USELESS ON JAMMU STATION
BIO TOILET - फोटो : DEMO PHOTO

बायो टायलेट के एक सेट पर करीब 17 लाख रुपये का खर्च आता है। जम्मू रेलवे स्टेशन पर 34 लाख रुपये की लागत से दो बायो टायलेट सेट बनाए गए। इनमें से एक सेट गेट नंबर दो के पास और दूसरा आरक्षण केंद्र के पास स्थापित है।बायो टायलेट सेट में पुरुषों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए तीन अगल-अलग शौचालय बनाए गए।

महिलाओं और पुरुषों के लिए दो अलग-अलग यूरिनल भी हैं। इन शौचालयों की विशेषता यह है कि इनका ढांचा पूरी तरह से स्टील का होता है, जिस पर पानी या जंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, जबकि इसमें बना सेफ्टिक टैंक भी स्टील का होता है। इसके साथ फिल्टर जुड़ा होता है। इस शौचालय में गिरने वाली गंदगी भी चंद दिनों में कंपोस्ट में तब्दील हो जाती है।

इन शौचालय के ओवर फ्लो होने की समस्या भी नहीं होती है, न ही बदबू फैलती है, लेकिन वक्त बीतने के साथ ही शहर की धूल मिट्टी से इसके आसपास काफी गंदगी इकट्ठा हो गई है और विभाग की लापरवाही के चलते इसका रखरखाव भी ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा। ऐसे मेें इनकी स्थिति जर्जर होना स्वाभाविक है। अगर विभाग ने इनकी सुध जल्द नहीं ली, तो 34 लाख रुपये धूल में मिल जाएंगे।

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