Baramulla: कुकर का प्रैशर नहीं भांप पाए उमर अब्दुल्ला, नेकां के गढ़ में इंजीनियर रशीद ने लिए दोगुने वोट
कश्मीर संभाग की तीन लोकसभा सीटों में सबसे दिलचस्प सीट बारामुला लोकसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार इंजीनियर रशीद की सुनामी ने नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और दिग्गज नेता उमर अब्दुल्लाह की नैया डुबो दी।
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बारामुला सीट पर अंतिम समय में ताल ठोंकने वाले निर्दलीय उम्मीदवार और तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर रशीद के चुनाव चिह्न कुकर का प्रैशर न भांप पाने से उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन को हार का सामना करना पड़ा। रशीद की जीत में नेकां के गढ़ वाले पांच में से चार क्षेत्रों के मतदाताओं ने अहम भूमिका निभाई। इन हलकों में रशीद को दोगुने के करीब वोट मिले।
लोकसभा चुनावों के 4 जून को नतीजे घोषित हुए, कश्मीर संभाग की तीन लोकसभा सीटों में सबसे दिलचस्प सीट बारामुला लोकसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार इंजीनियर रशीद की सुनामी ने नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और दिग्गज नेता उमर अब्दुल्लाह की नैया डुबो दी। इतना ही नहीं इंजीनियर रशीद की सुनामी ने उमर के कुछ ऐसे वोट बैंक वाले क्षेत्रों में सेंध लगाने में सफलता हासिल की जिनको जानकारों के अनुसार तोड़ना या सेंध लगाना किसी ने सोचा नही था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के गढ़ करनाह में रशीद को 20061, उमर को 4810, बीरवाह में रशीद को 27469, उमर को 19520, बांदीपोरा में रशीद को 42404, उमर को 12220), सोनावारी में रशीद को 29931, उमर को 22430, उड़ी रशीद को 28644, उमर को 20429 वोट मिले। बीरवाह विधानसभा क्षेत्र से उमर विधायक भी रह चुके हैं। बारामुला लोकसभा क्षेत्र के 18 में से 14 विधानसभा क्षेत्रों पर इंजीनियर रशीद की सुनामी ने उमर की नैया डुबो दी। नेकां को तीन हलकों में जबकि सज्जाद गनी लोन को एक में बढ़त मिली। 2014 में सात विस क्षेत्रों से जीतने वाली पीडीपी कहीं बढ़त हासिल नहीं कर पाई और चौथे स्थान पर सिमट गई।
रशीद के मैदान में उतरते ही बिगड़ गई उमर की कहानी
रशीद ने लोकसभा क्षेत्र बारामुला से 472481 वोट हासिल किए और निकटतम प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला को 204142 वोटों के अंतर से हराया। अब्दुल्ला को 268339 वोट मिले। लोन को 173239 मत प्राप्त हुए। लंगेट विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे रशीद को 45.7 प्रतिशत,अब्दुल्ला 26 और लोन 16.8 प्रतिशत वोट शेयर मिला। बारामुला सीट पर सीधे तौर पर मुकाबला अब्दुल्ला और लोन के बीच माना जा रहा था, लेकिन जैसे ही रशीद मैदान में उतरे, तो उनके लिए समर्थन बढ़ गया। उनके बेटे अबरार और असरार ने अभियान संभाला और मतदाताओं से उनके लिए समर्थन और वोट करने की अपील की।