{"_id":"570e86e64f1c1b8c5d4a6ad6","slug":"baisakhi-was-celebrated-in-kashmir","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाबंदियों के बीच कश्मीर घाटी में भी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई बैसाखी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाबंदियों के बीच कश्मीर घाटी में भी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई बैसाखी
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Thu, 14 Apr 2016 10:00 AM IST
विज्ञापन
वैसाखी पर गुरुद्वारे में मौजूद लोग
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर के पुराने शहर में लागू पाबंदियों के बीच सिख समुदाय के लोगों द्वारा पूरे उत्साह के साथ बैसाखी का पर्व मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य समारोह श्रीनगर के रैनावारी स्थित गुरुद्वारा छठीं पादशाही में आयोजित हुआ, जहां सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर माथा टेका।
स्थानीय और राज्य के बाहर से आये रागी जथों ने शब्द कीर्तन से संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा साहिब में लंगर का भी इंतजाम किया गया। हालांकि सिख संगत में कहीं न कहीं अलगाववादियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखी।
उनका कहना था कि अलगाववादियों को पता था कि सिखों का बड़ा दिन है तो बंद की कॉल नहीं करनी चाहिए थी। प्रशासन की ओर से गुरुद्वारा आने वाले श्रद्धालुओं के ट्रांसपोर्ट की भी कोई व्यवस्था नहीं की, जिससे उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि श्रीनगर के अलावा पुलवामा, बडगाम, बारामुल्ला आदि जिलों में भी बैसाखी के अवसर पर विभिन गुरुद्वारों में कार्यक्रम आयोजित किये गए, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कश्मीर में बैसाखी बाकी जगहों से अलग होती है, क्योंकि इस दिन रिवायती तौर पर मुग़ल बाघ (निशात, शालीमार, हारवन, आदि) आम जनता के लिए खोले जाते हैं।
विज्ञापन
स्थानीय और राज्य के बाहर से आये रागी जथों ने शब्द कीर्तन से संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा साहिब में लंगर का भी इंतजाम किया गया। हालांकि सिख संगत में कहीं न कहीं अलगाववादियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखी।
विज्ञापन
उनका कहना था कि अलगाववादियों को पता था कि सिखों का बड़ा दिन है तो बंद की कॉल नहीं करनी चाहिए थी। प्रशासन की ओर से गुरुद्वारा आने वाले श्रद्धालुओं के ट्रांसपोर्ट की भी कोई व्यवस्था नहीं की, जिससे उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि श्रीनगर के अलावा पुलवामा, बडगाम, बारामुल्ला आदि जिलों में भी बैसाखी के अवसर पर विभिन गुरुद्वारों में कार्यक्रम आयोजित किये गए, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कश्मीर में बैसाखी बाकी जगहों से अलग होती है, क्योंकि इस दिन रिवायती तौर पर मुग़ल बाघ (निशात, शालीमार, हारवन, आदि) आम जनता के लिए खोले जाते हैं।