कश्मीरः आतंक और अलगाववाद को बंपर वोटिंग से जवाब
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जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में जमकर हुई वोटिंग ने उन अनुमानों और अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें इस बार वोटिंग कम होने की आशंका जताई जा रही थी।
बदलाव के पक्ष में खड़ी कश्मीर की जनता ने आतंक और अलगाववादियों को आइना दिखाते हुए पहले चरण में जमकर वोट डाले। मंगलवार को कुल 15 सीटों के लिए हुए मतदान में 70 फीसदी लोगों ने जम्हूरियत की बेहतरी के लिए योगदान दिया।
जबकि पूर्व में 2008 में हुए चुनावों में प्रथम चरण में कुल 66 फीसदी वोटिंग हुई थी। मतदाताओं के इस उत्साही रवैये से उम्मीद की जा रही है कि आगामी चरणों में मतदान का प्रतिशत नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
प्रथम चरण में ही हाशिये पर आ गए अलगाववादी
पहले चरण की इस वोटिंग से जहां यह साफ हो गया कि कश्मीर की जनता का तमाम आशंकाओं के बावजूद लोकतंत्र में विश्वास और मजबूत हुआ है वहीं यह बात भी साफ हो गई है कि अलगाववादियों की विघटनकारी और पाक परस्त नीतियों पर यहां के लोगों को बिल्कुल विश्वास नहीं रह गया है।
यही कारण है कि हर बार चुनावों का बहिष्कार करने वाले अलगाववादी चुनाव दर चुनाव मुंह की खाने लगे हैं। इस बार भी वही हुआ, चुनावों से पहले सभी अलगाववादी संगठनों ने चुनावों का खुलकर बहिष्कार करते हुए लोगों से वोट न देने की अपील की थी।
लेकिन उनकी दोगुली बातों का आम जनता पर रत्ती भर असर नहीं दिखाई दिया, बल्कि पिछली बार के मुकाबले लोगों ने इस बार ज्यादा बढ़चढ़कर वोट किया। आंकडों पर गौर करें तो 1996 के बाद जनता ने पहली बार मतदान के प्रति इस तरह का उत्साह दिखाया है। पूर्व में 2002 और 2008 में भी मतदान का आंकड़ा इस स्तर को नहीं छू पाया था।
बाढ़ के गमों को भुलाकर आगे बढ़ी कश्मीर की जनता
प्रथम चरण में 70 फीसदी का आंकड़ा इसलिए भी बेहतर माना जा रहा है कि जिन सीटों पर वोट पड़े उनमें से आधी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की थी, जहां अभी पुर्नवास का काम चल ही रहा है। इसके बावजूद लोगों ने अपने गमों से ऊपर उठकर जम्हूरियत की बेहतरी के लिए खुले दिल से मतदान किया।
हालांकि मतदान के बढ़े आंकड़े ने बेशक राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी होंगी लेकिन यह साफ है कि कश्मीर की जनता बेहतर भविष्य की उम्मीद में बढ़-चढ़कर मतदान कर रही है।
वहीं लोकतंत्र के प्रति कश्मीर के लोगों में बढ़ती आस्था को भारत के प्रति बढ़ते विश्वास के तौर पर भी देखा जा रहा है। उम्मीद है अगले चार चरणों में यह विश्वास और बढ़ेगा।