मोदी के 'मिशन 44 प्लस' ने पाकिस्तान में मचाई खलबली?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से देश की बागडोर संभाली है, तब से पड़ोसी देश पाकिस्तान उनके हर कदम पर गहराई से नजर रख रहा है। मोदी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए ‘मिशन 44 प्लस’ का नारा दिया तो पाकिस्तान के भी कान खड़े होने स्वाभाविक थे।
मोदी का नारा जम्मू-कश्मीर की सरहदों को पार करता हुआ पाकिस्तान तक जा पहुंचा। पाकिस्तान के तमाम अखबार रियासत में होने वाले चुनाव पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबारों में से एक ‘डान’ ने तो यहां तक लिखा डाला कि हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर में दुस्साहसिक चुनावी योजना लांच की है। मोदी के लिए यह कड़ी परीक्षा है।
पाक अखबारों में दिखी मोदी की चुनावी रणनीति
कश्मीर घाटी में उनकी पार्टी का कोई आधार नहीं है और वहां उन्हें मुस्लिम विरोधी के रूप में देखा जाता है। पाक अखबार का मानना है कि मोदी ने वहां के अलगाववादी नेताओं को अपने पक्ष में करना शुरू कर दिया है।
पूर्व अलगाववादी नेता सज्जाद लोन मोदी से मिले और उन्होंने यहां तक कह दिया कि मोदी कश्मीर की किस्मत बदल सकते हैं। इससे कांग्रेस के अलावा कश्मीर की दोनों क्षेत्रीय पार्टियां भी हिल गईं हैं।
इतना ही नहीं, मोदी अन्य प्रदेशों की तरह घाटी में भी ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘एक्सप्रेस वे’ का सपना दिखा रहे हैं। अखबार ने कश्मीर यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर का हवाला देते हुए लिखा कि पहले वे भाजपा के मिशन 44 प्लस को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक देख रहे थे, लेकिन वे योजनाबद्ध तरीके से कश्मीर में प्रवेश करने में जुटे हैं।
सभी पाक अखबारों के निशाने पर मोदी
वे चाहते हैं कि भले ही उनकी सरकार न बने, लेकिन वे सरकार में भूमिका अदा करने की स्थिति में जरूर पहुंच जाएं। द एक्सप्रेस ट्रिब्युन का कहना है कि यदि जम्मू कश्मीर के लोग चुनाव का बायकाट करते हैं तो उसका फायदा भी मोदी की टीम को मिलेगा। इसलिए वहां इस बार बायकाट का मामला उतना जोर नहीं पकड़ रहा है।
द पाक मीडिया ने रियासत के चुनाव को उछाल कर पेश किया है। अखबार के अनुसार भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देश पर केंद्र और राज्य सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भारी मात्रा में सुरक्षा बल भेजे हैं, ताकि चुनाव सफलतापूर्वक करवाएं जा सकें।