इस बार 'बड़ी भूमिका' निभा सकते हैं छोटे दल
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राज्य विधानसभा चुनाव 2014 में छोटे सियासी दलों की भूमिका अहम होगी। इन दलों में पैंथर्स, सीपीएम, जेकेएनडीपी, पीडीएफ और जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रंट शामिल हैं।
यह बात दीगर है कि विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय सियासी दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच जम्मू संभाग में और क्षेत्रीय दलों नेकां और पीडीपी के बीच कश्मीर संभाग में सीधा मुकाबला माना जा रहा है।
इस परिदृश्य के बीच मौजूदा विधानसभा में तीन विधायकों वाली पैंथर्स, एक-एक विधायक वाली पीडीएफ, जेकेएनडीपी और सीपीएम भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ेगी। जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रंट की भी पहली दफा चुनाव लड़ने की अटकलें हैं।
भाजपा कांग्रेस में नहीं रहा कोई अंतर
पैंथर्स अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह का कहना है कि रियासत के पुनर्गठन के वादे के साथ उनकी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी। बतौर प्रो. सिंह भाजपा और कांग्रेस में अब कोई अंतर नहीं रहा।
सीपीएम के मौजूदा विधायक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी, जेकेएनडीपी के गुलाम हसन मीर और पीडीएफ के हकीम यासीन का कहना है कि उनके दलों के प्रत्याशी विधानसभा चुनाव गंभीरता से लड़ेंगे।
सूत्रों के मुताबिक जम्मू वेस्ट से विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. चमन लाल गुप्ता की भाजपा में वापसी पर जेकेडीएफ का सियासी भविष्य निर्भर करेगा। इसमें होने वाली देरी की वजह से फ्रंट कैडर का नेतृत्व पर चुनाव लड़ने के लिए दबाव बढ़ रहा हैं।
इस संबंध में जेकेडीएफ के अध्यक्ष अनिल गुप्ता का कहना है कि समय आ गया है कि जम्मू संभाग और राष्ट्रवादी समाज के हित में राष्ट्रवादी ताकतों को एक हो जाना चाहिए।