सेना ने एलओसी पर चलाया 'मिशन हमसफर'
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सेना ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीमा से सटे गांवों में एक अभियान छेड़ा है। इस अभियान के तहत उन गांवों को चुना गया है जो सेना की फायरिंग रेंज के आस-पास बसे हुए हैं।
सेना इस अभियान का नाम 'मिशन हमसफर' रखा है। इस अभियान के तहत ट्रेनिंग के दौरान जो गोले या मोर्टर नहीं फटते हैं या जमीन में दब जाते है, उन्हें साफ किया जाएगा।
ले.कर्नल मनीष मेहता ने बताया कि हमने इस अभियान के तहत अखनूर सेक्टर से सटी फायरिंग रेंज कलैथ फील्ड फायरिंग रेंज के पास स्थित गावों में सेना द्वारा दागे गए बिना फटे हुए गोलों को तलाश कर उन्हें निष्क्रय किया जाएगा।
पहले भी आर्मी चला चुकी है ऐसे अभियान
यह इस तरह का कोई पहला अभियान नहीं है। सेना पिछले सप्ताह टोसा मैदान एरिया में ऑपरेशन फलाह चला चुकी है। इसके तहत सेना ने आस-पास के इलाकों के गांवों को साफ किया।
इस मिशन के तहत सेना ने एक जागरुकता आभियान भी चलाया। सेना ने आस-पास वाले ग्रामीणों को बताया कि जब फायरिंग रेज में अभ्यास हो रहा हो तो किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
भारतीय सेना की क्रॉस्ड स्वोर्ड्स डिवीज़न ने इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नागरिकों और पशुओं की सुरक्षा के लिए बडे स्तर पर ये ड्राइव चलाई।
जानिए कलैथ फायरिंग रेंज के बारे में
कलैथ फील्ड फायरिंग रेंज सेना की आर्टिलरी के लिए एक सुरक्षित फायरिंग रेंज मानी जाती है। नार्दन कमांड यहां पर छोटे फायरिंग हथियार और मोर्टार का अभ्यास करती है। यह इलाका एलओसी से बिलकुल सटा हुआ है।
जलाई 2011 में स्टेशन मुख्यालय पल्लनवला पर कलैथ फील्ड फायरिंग रेंज की स्थापना की स्थापना हुई थी। अभी तक फिलहाल इस फायरिंग रेंज किसी तरह की कोई ऐसी घटना नहीं हुई है जिसेसे स्थानीय लोगों को कुछ नुकसान पहुंचा हो।