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एंटी करप्शन डेः जन्नत में जमीन से जुड़ा भ्रष्टाचार का जिन्न, इस घोटाले ने देश में मचाया भूचाल

Mon, 09 Dec 2019 02:05 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 09 Dec 2019 02:05 PM IST
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anti corruption day, jammu kashmir state land act and roshini scam
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हर साल की तरह आज यानी कि नौ दिसंबर को विश्व, अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस ( International Anti Corruption Day) मना रहा है। बात अगर भारत की करें तो यहां भ्रष्टाचार पर चर्चा और इसके विरोध में होने वाले आंदोलनों की एक लंबी लिस्ट है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए समय-समय पर कई कानून बने। जिनसे भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की कोशिश की गई। लेकिन हकीकत कुछ और कहती है। भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा देश उबरता नजर नहीं आता। ऐसा ही एक घोटाला जम्मू-कश्मीर में हुआ जिसने देश में हलचल मचा दी। राजनीतिक गलियारों में इसकी आहट काफी तीव्र रही।

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साल 2001 में जम्मू कश्मीर राज्य भूमि अधिनियम अर्थात रोशनी अधिनियम पारित हुआ था। कुछ दिन बीतते ही तत्कालीन प्रदेश सरकार को अनियमितताओं व धोखाधड़ी की शिकायतें मिलना शुरू हुईं। आरोपों का दौरा शुरू हुआ।
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आरोप थे कि जम्मू और श्रीनगर में सोने के भाव बिकने वाली जमीन पर उन लोगों ने अपना कब्जा कर लिया जो असल में उसके मालिक थे ही नहीं। साल 2014 में इस मामले से जुड़े घोटाला सामने आया तो प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हलचल मच गई। कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में 25 हजार करोड़ रुपयों के घोटाले का खुलासा किया था।
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साल 2018 में तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निर्देश पर रोशन अधिनियम को निरस्त कर दिया गया। इसके साथ ही तत्कालीन राज्यपाल ने पिछली रिपोर्ट के आधार पर जम्मू और श्रीनगर के सभी मामलों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी।

साल 2014
-सीएजी ने कहा है कि दस लाख कनाल जमीन पर अतिक्रमण किया गया था, रोशनी एक्ट लागू होते ही यह आंकड़ा बीस लाख पहुंच गया। अतिक्रमण करने वाले अधिकतर लोग राजनेता और नौकरशाह हैं।

-जम्मू में प्रमुख लेखाकार सुभाष चंद्र पांडे ने कहा कि वर्ष 2001 में रोशनी एक्ट लागू हुआ। इस एक्ट को लागू करने का मकसद राजस्व जमा करके बिजली क्षेत्र और अन्य संस्थानों का विकास करना था।

-वर्ष 2006 से लगातार सरकार से रिपोर्ट मांगी जा रही थी कि कितने लोगों को रोशनी एक्ट का लाभ दिया गया। सरकार ने मुख्य सचिव, मंडलायुक्त और डीसी से रिपोर्ट मांगी और अभी तक पूरी रिपोर्ट पेश नहीं हुई।

-सीएजी को 547 केसों की ही सूची सौंपी गई, जिसमें 666 कनाल जमीन को रोशनी एक्ट के तहत नियमित किया गया। इस जमीन से मार्केट प्राइज से 325 करोड़ रुपये हासिल होने थे। सरकार को केवल सौ करोड़ ही मिल पाए और 225 करोड़ रुपये इनसेंटिव दिए गए।

 

क्या था रोशनी एक्ट

रोशनी एक्ट लागू होने से पहले लोगों के पास दस लाख कनाल सरकारी जमीन कब्जे में थी। एक्ट में प्रावधान था कि 1990 से पहले जिसके पास सरकारी जमीन का कब्जा है, वह ही इस एक्ट का लाभ उठा सकेंगे। वर्ष 2004 और 2007 में संशोधन हुआ और उसमें 1990 का प्रावधान काट दिया गया।

नए कानून की सूचना लीक हुई। इससे कई लोगों ने खाली पड़ी जमीन पर भी कब्जा कर लिया। सरकारी जमीन पर कब्जे का आंकड़ा दस लाख कनाल से बीस लाख कनाल तक पहुंच गया। कब्जा करने वाले 547 लोगों में से भी अधिकतर लोग राजनेता और नौकरशाह हैं, जिनके नाम नहीं बताए गए। बीस लाख कनाल जमीन पर कब्जा होने से 25,500 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और सरकार को घाटा हुआ।

इस घाटे का आकलन 2006 का है और 2014 में जमीनों के रेट काफी बढ़ गए हैं। हालांकि रोशनी एक्ट में नीलामी का भी प्रावधान था और सरकार ने राहत देकर कृषि योग्य जमीन को भी मुफ्त में अलाट कर दिया। इसकी रिपोर्ट अगर सही समय पर दी जाती तो सीएजी रिपोर्ट सितंबर, 2013 को सौंप देती। रिपोर्ट का इंतजार होता रहा और मार्च में बजट सत्र में रिपोर्ट पेश करनी पड़ी।

रोशनी एक्ट के तहत जिन लोगों के पास सरकारी जमीन पर कब्जा था। वह जमीन उन्हीं लोगों को अलाट किए जाने का प्रावधान था। व्यावसायिक और शहरी क्षेत्रों की जमीन पर मार्केट रेट वसूलने और कृषि योग्य जमीन को सस्ते दामों पर अलाट करने का भी प्रावधान था।

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