जम्मू-कश्मीर में संघ ने भाजपा के पाले में डाली गेंद
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वैचारिक मुद्दों को दरकिनार कर पीडीपी के साथ गठबंधन के मामले पर संघ ने नसीहतों के साथ निर्णय का फैसला भाजपा आलाकमान पर छोड़ दिया है। संघ का मानना है कि भाजपा को राष्ट्र की राजनीति करनी है, जबकि पीडीपी की राजनीति पूरे जम्मू-कश्मीर की भी न होकर महज घाटी तक सीमित है।
वीरवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने झंडेवाला स्थित संघ कार्यालय ‘केशव कुंज’ पहुंच संघ में दूसरे नंबर के नेता सुरेश भैयाजी जोशी से अलग से भेंट की। इस दौरान संघ के सह सरकार्यवाह दतात्रेय होसबोले, सुरेश सोनी और क़ृष्ण गोपाल भी उपस्थिति थे। शाह भाजपा के साथ समन्वय का काम देख रहे कृष्ण गोपाल से अलग से भी मिले।
इस दौरान उन्होंने संघ नेताओं से जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में आए खंडित जनादेश के बाद पीडीपी से साथ सरकार गठन को लेकर चल रही बातचीत पर विस्तार से चर्चा की। बताया जा रहा है कि इसमें अफस्पा और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर भी शाह ने अपना पक्ष रखा।
क्या चाहती है पीडीपी भाजपा से
पीडीपी के साथ गठबंधन कर सरकार गठन के प्रयास में लगे नेताओं की दलील है कि अल्पसंख्यकों खासतौर से मुस्लिम समुदाय का दिल जीतने के प्रयास में पार्टी के सामने यह सुनहरा अवसर है। दिल्ली हार के बाद भाजपा रणनीतिकारों को मिशन 2019 के लिए पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार सियासी फायदे का लग रहा है।
इस बीच आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) कानून के पहलुओं पर सरकार ने सेना का भी मन टटोलना शुरू कर दिया है। दिल्ली की हार के बाद वीरवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पहली बार संघ के शीर्ष नेताओं से लंबी मंत्रणा की है।
सूत्रों के मुताबिक संघ का रुख सामने आने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी वीरवार को पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती से फोन पर बात की है। न्यूनतम साझा कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 और अफस्पा पर शब्दों की हेरफेर के जरिये भाजपा का प्रयास पीडीपी से मिलकर जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का है। मगर संघ के पेंच ने मामला उलझा दिया है।