Amarnath Yatra 2023: स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग सेवा भाव में जुटे, श्रद्धालुओं को पहुंचा रहे हरसंभव सहायता
अमरनाथ यात्रा में सांप्रदायिक सद्भाव का उल्लेखनीय प्रदर्शन भी देखने को मिल है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग सेवा भाव में जुटे हैं। वह भक्तों को उदारतापूर्वक प्रार्थना सामग्री और अन्य सहायता प्रदान करते हैं।
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मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में श्री अमरनाथ की पवित्र तीर्थ यात्रा के लिए आधार शिविर बालटल विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश भर से तीर्थ यात्री बालटाल में आए हैं, जिससे माहौल पूरा उत्सव जैसा हो गया है। बालटाल आधार शिविर में पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों का स्वागत रंगीन रोशनी और शानदार सामुदायिक रसोई (लंगर) से किया जाता है।
भजन से यहां का वातावरण भक्तिमय बन गया है। खोई और पाई गई वस्तुओं के बारे में घोषणाएं भी होती हैं। सांप्रदायिक सद्भाव का उल्लेखनीय प्रदर्शन भी देखने को मिलता है, जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग सेवा भाव में जुटे हैं। वह भक्तों को उदारतापूर्वक प्रार्थना सामग्री और अन्य सहायता प्रदान करते हैं।
सामुदायिक रसोई में पूरे दिन भारी भीड़ देखी जाती है। इसके अलावा, कश्मीरी मुसलमान तीर्थयात्रियों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह तंबुओं पर उनके आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। टट्टू के मालिक, दुकानदार और मजदूर भी दिव्य यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं।
स्थानीय कश्मीरी बसीर अहमद ने कहा, हम यहां सिर्फ यात्रियों की सेवा के लिए आते हैं। चाहे बैग हो, कैमरा हो या मोबाइल उनको मुफ्त में जमा करते हैं। यह हमारा भाईचारा है, हम कश्मीरियत को ज़िंदा रखते हैं। ज़फर ने कहा, जब यात्रा शुरू होती है, हम यहां अपना रोजगार कमाने आते हैं।
पालकी वाले मुज़फ्फर हुसैन ने कहा, पालकी डंडों और कुर्सी से बनाई होती है और जो बुज़ुर्ग यात्री होते हैं, उन्हें उस सवारी पर ले जाते हैं। हम खाली पैसा ही नहीं बुज़ुर्ग यात्रियों की दुआएं भी पाते हैं। घोड़े वाले मोईन ने कहा, हम सभी लोग यहां कश्मीर के बाशिंदे हैं। ये भाईचारे की बड़ी मिसाल है।
पठानकोट से आए श्रद्धालु अमित कुमार ने कहा, जो यहां लोकल बंदे हैं उन्होंने बड़ा साथ दिया हमारा। कोई कमी नहीं छोड़ी। अगर कोई छोटी चीज़ भी मांगी है तो एक के बदले दो दी। जैसा कश्मीरियत के बारे में वैसा ही अनुभव भी हुआ। सबसे यह कहूंगा कि कश्मीर को कुछ तत्वों के चलते बदनाम न करो।
वहीं यात्रा पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार आने वाले एक साधु ने कहा, यहां पर जो भी रखरखाव, हमारी जो भी ज़रुरत की चीज़ें हैं, वो सभी मुस्लिम समुदाय के हमारे भाइयों द्वारा किया जाता है। चाहे साफ़ सफाई की ड्यूटी हो, प्रसाद की सामग्री हो,घोड़े या पालकी की सेवा हो सब मुस्लिम समुदाय के लोग करते हैं।
यात्रा में जितनी भी मदद होती है वो यहां के स्थानीय भाईचारे के लोग करते हैं। यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मिसाल है, यहां से अच्छा भाईचारा हमने कभी देखा नहीं है। मैं पूरे हिंदुस्तान में भ्रमण करता रहता हूं।
आधार शिविर में ही मनाई ईद
बालटाल आधार शिविर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। कश्मीरियों को भी बेसब्री से भक्तों का इंतज़ार था। इस बीच वीरवार को ईद भी थी। इस दौरान उन्होंने घर जाने की बजाय बालटाल आधार शिविर में ही ईद मनाई।
उनका कहना था कि उनके लिए यही ईद है। बालटाल आधार शिविर में कई वर्षों से टेंट लगाने वाले अब्दुल रशीद ने कहा, हर साल हमें यात्रियों की सेवा करने में हमें बहुत आनंद मिलता है।
जब हम यहां आते हैं हमें काफी सुकून मिलता है। यात्रा के शुरू होने से पहले ही हम यहां आधार शिविर में पहुंच जाते हैं और हमें बेसब्री से बाबा बर्फानी के भक्तों का इंतज़ार रहता है।