राज्यसभा चुनाव के लिए खुलने लगे दलों के पते
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तेजी से बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच पीडीपी ने राज्यसभा के लिए अपने दो प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा की ओर से अभी घोषणा बाकी है। कांग्रेस ने फिलहाल संख्या बल को देखते हुए अपने को चुनाव से किनारे रखने का फैसला किया है।
नेकां भी जीत के लिए पर्याप्त विधायकों की संख्या न होने के चलते चुप्पी साधे हुए है। त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में जो समीकरण बने हैं उसके तहत पीडीपी और भाजपा रियासत की चार में से दो-दो सीटों पर कब्जा करने में सफल हो सकती हैं।
पीडीपी
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने नजीर अहमद लावे और फैयाज अहमद मीर को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। दोनों ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन, हार गए थे। कुलगाम से लावे 334 और कुपवाड़ा से मीर 151 वोटों के अंतर से पराजित हुए थे।
पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं की सहमति से नामों की घोषणा की गई है। दोनों युवा हैं तथा पार्टी की रीति-नीतियों को बढ़ाने में बढ़ चढ़कर भागीदारी करते हैं।
प्रत्याशी चयन के लिए मंथन जारी: भाजपा
भाजपा की ओर से भी प्रत्याशी चयन के लिए मंथन चल रहा है। दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व इस पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि राज्य इकाई ने नामों का पैनल हाईकमान को भेज दिया है। लेकिन, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व एक सीट पर स्थानीय और एक पर भाजपा महासचिव राम माधव को प्रत्याशी बनाना चाहता है।
पार्टी का मानना है कि राम माधव के जम्मू की राजनीति में सक्रिय रहने से उसके मिशन कश्मीर को मजबूत मिलेगी। साथ ही विजन 2020 को पूरा करने में सहूलियत रहेगी। सूत्रों ने बताया कि जल्द ही पार्टी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करेगी। इसके लिए दिल्ली में शीर्ष स्तर पर मंथन चल रहा है।
कांग्रेस
कांग्रेस ने संख्या बल को देखते हुए फिलहाल चुनाव से दूरी बना ली है। यहां से गुलाम नबी आजाद और प्रो. सैफुद्दीन सोज पार्टी के टिकट पर राज्यसभा में हैं। दोनों का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। ऐसे में दोनों का राज्यसभा पहुंचना मुश्किल है।
प्रदेश अध्यक्ष प्रो. सोज का कहना है कि पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने लायक नंबर नहीं हैं। न ही अभी तक किसी अन्य राजनीतिक दल ने पार्टी से एप्रोच किया है। ऐसे में पार्टी का उम्मीदवार उतारना ठीक नहीं होगा। हालांकि, भविष्य में क्या होगा यह वह कह नहीं सकते।
नेकां वेट एंड वाच की स्थिति में
पर्याप्त संख्या बल न होने के नाते नेकां वेट एंड वाच की स्थिति में है। सूत्रों का कहना है कि जीत हासिल करने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।
इस नाते वह चुनाव से दूर रहकर राजनीतिक हालातों पर नजर रख रही है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी की दिलचस्पी नहीं है।
हालांकि, नेकां और कांग्रेस के बीच खिचड़ी पकने की चर्चा थी। कहा जा रहा था कि कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा में भेजने के लिए नेकां से बातचीत चल रही है, लेकिन उमर ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला की वकालत कर इस संभावना को खारिज कर दिया।