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आजादी के बाद भी हवाई अड्डे और रेल ट्रैक से वंचित कुरुक्षेत्र

Fri, 15 Aug 2014 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र Updated Fri, 15 Aug 2014 12:08 AM IST
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Airport and railway track after independence denied Kurukshetra
आजादी की 68वीं वर्षगांठ मनाते समय गर्व से कहा जा सकता है कि कुरुक्षेत्र हवाई अड्डे और रेल ट्रैक से वंचित हैं। वहीं ये क्षेत्र न केवल पर्यटन, बल्कि एजुकेशन हब के रूप में भी उभरा है।
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स्वतंत्रता के 67 सालों के बाद कुरुक्षेत्र का स्वरूप कई मामलों में निखरकर आया है। दूसरे शब्दों में कहें तो देश के एक पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा कुरुक्षेत्र के विश्वकर्मा साबित हुए।
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ये नंदा के ही प्रयास थे कि चार दशक पहले करनाल का हिस्सा रहे कुरुक्षेत्र को 23 जुलाई 1973 के  दिन अलग जिले का दर्जा हासिल हुआ। इस क्षेत्र से सांसद रह चुके नंदा ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन कर न केवल तीर्थों का विकास किया।
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बल्कि कुरुक्षेत्र से उन सुविधाओं को भी जोड़ा जिसके बल पर कुरुक्षेत्र अलग पहचान बना चुका है। बुजुर्गों की मानें तो 15 अगस्त 1947 में जब देश ने आजादी सांस ली तो उस समय कुरुक्षेत्र में दलदल से भरे सरोवर, छोटा सा रेलवे स्टेशन स्कूल के नाम पर कुरुक्षेत्र में एक गुरुकुल एवं 1946 में स्थापित एक आर्य स्कूल था।

आज कुरुक्षेत्र में देश का अग्रणी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा स्थापित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, जिसे हरियाणा की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी होने का गौरव प्राप्त है।

हाल ही में देश के दूसरे एनआईडी की आधारशिला कुरुक्षेत्र में रखी जा चुकी है। जिले में अनेक सरकारी व निजी स्कूल-कॉलेज शामिल हैं।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य डा.रामप्रकाश की मानें तो देश में कुरुक्षेत्र ऐसा पहला नगर है, जहां बालाजी, इस्कॉन टेंपल और अक्षरधाम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 18 अगस्त को पिहोवा रोड ज्योतिसर में बनने वाले इस्कॉन टेंपल की आधारशिला मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा रखेंगे।

इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा कहते हैं कि इनेलो केशासनकाल में कुरुक्षेत्र पर खास फोकस किया गया लेकिन कांग्रेस ने विकास की इस गति को रोकने का काम किया।


67 साल में जो नहीं हो सका
-कुरुक्षेत्र-पिहोवा-पटियाला रेल ट्रैक।
-कुरुक्षेत्र-यमुनानगर रेल ट्रैक।
-सरस्वती नदी का उत्थान।
-महाभारत कालीन तीर्थों का विकास।
-ज्योतिनगर स्थित सूरजकुंड का जीर्णोद्धार।
-हवाई अड्डा बनाने की घोषणा।
-कुरुक्षेत्र-यमुनानगर, कुरुक्षेत्र-कैथल एवं कुरुक्षेत्र-पिहोवा रोड फोरलेन।
-धर्मनगरी में राजकीय कालेज।
-पिपली में इंटर स्टेट बस अड्डा।
-जिले पुराने शहरों थानेसर, पिहोवा, लाडवा, शाहाबाद के बाजारों में अतिक्रमण नहीं हटा।

67 साल में कुरुक्षेत्र ने जो हासिल किया
एक यूनिवर्सिटी, एक एनआईटी, पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र, करोड़ों की लागत से बना श्रीकृष्ण संग्रहालय, कल्पना चावला तारामंडल, एनआईटी, ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, सरस्वती तीर्थ का सौंदर्यीकरण, शेखचिल्ली मकबरा, हर्षवर्धन पार्क और हर्ष के टीले का सौंदर्यीकरण।
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