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किसानों को तारबंदी के आगे की भूमि पर काश्त करने का अनुरोध
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सांबा। हीरानगर के किसान भारत-पाक सीमा पर लगाए गए कंटीले तार के आगे की भूमि पर काश्त कर रहे हैं। जबकि सांबा जिले के सीमावर्ती किसान तारबंदी के आगे की भूमि पर खेती करने को कतरा रहें। किसानों का कहना है कि तारबंदी में लगाए गेट काफी दूर हैं। इससे किसानों को आने जाने में भी काफी परेशानी बनी रहती है।
उन्हें अपनी भूमि की हदबंदी के बारे में भी पता नहीं है। इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से सांबा जिला के सीमावर्ती किसानों को आरएसपुरा की सुचेतगढ़ सीमा पर ले जाया गया व उन्हें तारबंदी के आगे की भूमि पर किसानों द्वारा की गई खेती के बारे में जागरूक किया। सांबा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों ने सुचेतगढ़ सेक्टर का दौरा करने के बाद आईबी पर लगाई गई तारबंदी के आगे की खेतों में खेती शुरू करने का संकल्प लिया है।
राजपुरा सदस्य राधा कृष्ण ने बताया कि सुशासन दिवस के मौके पर गत दिवस उन्हें जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सुचेगढ़ की सीमा पर तारबंदी के आगे की भूमि पर की गई खेती दिखाई। जो जीरो लाइन के निकट की जा रही है। वहीं बीएसएफ के अधिकारियों ने भी उन्हें भरोसा दिलाया कि पाक रेंजरों के साथ बैठक कर उन्हें भी किसानों को खेती करने बारे में कह दिया है। किसान बेखौफ होकर खेती करें।
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इस अवसर पर राजपुरा, सांबा और रामगढ़ के पीआरआई सदस्यों के साथ 100 किसानों के दल ने सुचेतगढ़ के किसानों और कृषि अधिकारियों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर खेती योग्य फसलों और किसानों के प्रयासों पर विस्तृत बातचीत की। गौरतलब है कि गत 15 वर्ष से तारबंदी के आगे की भूमि बंजर पड़ी थी। पाकिस्तानी रेजरों की गोलीबारी के कारण किसानों ने तारबंदी के आगे की भूमि पर खेती करना बंद कर दिया था। अब सीजफायर के चलते बीएसएफ की ओर से बंजर भूमि को आबाद कर किसानों को दी जा रही है। ताकि वह फसल लगा सकें। जबकि सांबा जिला के सीमावर्ती किसान खेती करने का कतरा रहे हैं।
जिला प्रशासन के साथ बीएसएफ भी सीमा के निकट भूमि पर खेती कराने का पूरा प्रयास कर रही है।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर जिला प्रशासन सांबा के सीमावर्ती किसानों को खेतों में आगे के क्षेत्रों में खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। सांबा के किसानों को इस का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सुचेतगढ़ की सीमा पर किसानों को ले जाया गया व वहां के किसानों से भी उनका संवाद किया गया। डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन और बीएसएफ के अधिकारी किसानों की चिंताओं को दूर कर उन्हें पूरा सहयोग देंगे और सीमा पर बाड़ के बाहर नियमित खेती करने में भी उनका सहयोग करेंगे।
-अनुराधा गुप्ता, उपायुक्त, सांबा
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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिला सांबा में सीमा पर तारबंदी के आगे 500 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का है। जो पहले बंजर थी। अब बीएसएफ ने काश्त योग्य भूमि बना दी है। क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ एलोवेरा, लेमन ग्रास आदि फसलों की भी बिजाई की जा सकती हैं। बंजर भूमि को भी बीएसएफ की मदद से काश्त योग्य बनाया जा सकता है।
-संजे वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी सांबा।
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उन्हें अपनी भूमि की हदबंदी के बारे में भी पता नहीं है। इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से सांबा जिला के सीमावर्ती किसानों को आरएसपुरा की सुचेतगढ़ सीमा पर ले जाया गया व उन्हें तारबंदी के आगे की भूमि पर किसानों द्वारा की गई खेती के बारे में जागरूक किया। सांबा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों ने सुचेतगढ़ सेक्टर का दौरा करने के बाद आईबी पर लगाई गई तारबंदी के आगे की खेतों में खेती शुरू करने का संकल्प लिया है।
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राजपुरा सदस्य राधा कृष्ण ने बताया कि सुशासन दिवस के मौके पर गत दिवस उन्हें जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सुचेगढ़ की सीमा पर तारबंदी के आगे की भूमि पर की गई खेती दिखाई। जो जीरो लाइन के निकट की जा रही है। वहीं बीएसएफ के अधिकारियों ने भी उन्हें भरोसा दिलाया कि पाक रेंजरों के साथ बैठक कर उन्हें भी किसानों को खेती करने बारे में कह दिया है। किसान बेखौफ होकर खेती करें।
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इस अवसर पर राजपुरा, सांबा और रामगढ़ के पीआरआई सदस्यों के साथ 100 किसानों के दल ने सुचेतगढ़ के किसानों और कृषि अधिकारियों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर खेती योग्य फसलों और किसानों के प्रयासों पर विस्तृत बातचीत की। गौरतलब है कि गत 15 वर्ष से तारबंदी के आगे की भूमि बंजर पड़ी थी। पाकिस्तानी रेजरों की गोलीबारी के कारण किसानों ने तारबंदी के आगे की भूमि पर खेती करना बंद कर दिया था। अब सीजफायर के चलते बीएसएफ की ओर से बंजर भूमि को आबाद कर किसानों को दी जा रही है। ताकि वह फसल लगा सकें। जबकि सांबा जिला के सीमावर्ती किसान खेती करने का कतरा रहे हैं।
जिला प्रशासन के साथ बीएसएफ भी सीमा के निकट भूमि पर खेती कराने का पूरा प्रयास कर रही है।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर जिला प्रशासन सांबा के सीमावर्ती किसानों को खेतों में आगे के क्षेत्रों में खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। सांबा के किसानों को इस का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सुचेतगढ़ की सीमा पर किसानों को ले जाया गया व वहां के किसानों से भी उनका संवाद किया गया। डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन और बीएसएफ के अधिकारी किसानों की चिंताओं को दूर कर उन्हें पूरा सहयोग देंगे और सीमा पर बाड़ के बाहर नियमित खेती करने में भी उनका सहयोग करेंगे।
-अनुराधा गुप्ता, उपायुक्त, सांबा
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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिला सांबा में सीमा पर तारबंदी के आगे 500 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का है। जो पहले बंजर थी। अब बीएसएफ ने काश्त योग्य भूमि बना दी है। क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ एलोवेरा, लेमन ग्रास आदि फसलों की भी बिजाई की जा सकती हैं। बंजर भूमि को भी बीएसएफ की मदद से काश्त योग्य बनाया जा सकता है।
-संजे वर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी सांबा।