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उपजाऊ भूमि में जमा पानी को निकालने की मांग
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ज्यौड़ियां। सैनिक समाज सभा खौड़ की तरफ से बुधवार को पलांवाला के मोहल्ला टीसीपी में एक बैठक हुई। इसमें सीमावर्ती गांवों के लोगों की समस्याओं को सुना गया। लोगों ने कहा कि पीर बाबा से गांव दढखौड़ तक की सड़क की खस्ताहाल में है। हम लोग सड़क की मरम्मत के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं।
इसके बावजूद सड़क की सुध नहीं ली जा रही है। पलांवाला बाजार के बीच की सड़क की हालत जर्जर है। पीडब्ल्यूडी की तरफ से कंकर डाल कर सड़क पर बने गड्ढों को तो भर दिया, लेकिन अभी तारकोल नहीं डाली गई। इससे पैदल चलना तक मुश्किल बना है। क्षेत्र के लोगों की तरफ से कई बार जुलूस भी निकाले गए, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है।
सीमावर्ती गांव पलातन, दडखौड, पलांवाला, बदोवाल तथा घिगडयाल आदि गांवों के किसानों ने बताया कि हमारे खेत से पानी की कोई निकासी नहीं होने से बरसात में पानी खेतों में भर जाता है। हमारी फसल नष्ट हो जाती है। ऐसा कई साल से चल रहा है, लेकिन पानी की निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। क्षेत्र के किसान व सेवानिवृत्त सुबेदार गुलबदन सिंह भाऊ ने बताया कि हमारी खेती योग्य उपजाऊ भूमि कारगिल युद्ध के दौरान से सेना के पास है। उस समय सेना तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने वादा किया था, कि हमें समय-समय पर मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन आज तक न मुआवजा दिया गया और न ही जमीन वापस की गई। सभा के पूर्व चेयरमैन सुबेदार मेजर फरजूल सिंह ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद आश्वासन दिया कि आप लोगों ने जो भी समस्याएं हमें बताई उनके समाधान के लिए सभा जल्द उपायुक्त से भेंट करेगी।
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इस सिलसिले में क्षेत्र के किसान अपनी समस्या बता चुके हैं। सरकार की तरफ से भी हम से उस जमीन का ब्योरा मांगा गया, जिसका पालन करते हुए प्रशासन की तरफ से पेपर वर्क किया जा रहा है, लेकिन कोविड-19 के चलते बंद हो गया है। अब जल्द ही इसका हल हो जाएगा।
-सुदेश कुमार शर्मा, तहसीलदार, खौड़
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इसके बावजूद सड़क की सुध नहीं ली जा रही है। पलांवाला बाजार के बीच की सड़क की हालत जर्जर है। पीडब्ल्यूडी की तरफ से कंकर डाल कर सड़क पर बने गड्ढों को तो भर दिया, लेकिन अभी तारकोल नहीं डाली गई। इससे पैदल चलना तक मुश्किल बना है। क्षेत्र के लोगों की तरफ से कई बार जुलूस भी निकाले गए, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है।
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सीमावर्ती गांव पलातन, दडखौड, पलांवाला, बदोवाल तथा घिगडयाल आदि गांवों के किसानों ने बताया कि हमारे खेत से पानी की कोई निकासी नहीं होने से बरसात में पानी खेतों में भर जाता है। हमारी फसल नष्ट हो जाती है। ऐसा कई साल से चल रहा है, लेकिन पानी की निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। क्षेत्र के किसान व सेवानिवृत्त सुबेदार गुलबदन सिंह भाऊ ने बताया कि हमारी खेती योग्य उपजाऊ भूमि कारगिल युद्ध के दौरान से सेना के पास है। उस समय सेना तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने वादा किया था, कि हमें समय-समय पर मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन आज तक न मुआवजा दिया गया और न ही जमीन वापस की गई। सभा के पूर्व चेयरमैन सुबेदार मेजर फरजूल सिंह ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद आश्वासन दिया कि आप लोगों ने जो भी समस्याएं हमें बताई उनके समाधान के लिए सभा जल्द उपायुक्त से भेंट करेगी।
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इस सिलसिले में क्षेत्र के किसान अपनी समस्या बता चुके हैं। सरकार की तरफ से भी हम से उस जमीन का ब्योरा मांगा गया, जिसका पालन करते हुए प्रशासन की तरफ से पेपर वर्क किया जा रहा है, लेकिन कोविड-19 के चलते बंद हो गया है। अब जल्द ही इसका हल हो जाएगा।
-सुदेश कुमार शर्मा, तहसीलदार, खौड़