EXCLUSIVE: एजेंसियों ने बनाई ऐसी रणनीति कि अलगाववादियों को जमानत मिलना भी मुश्किल
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कश्मीर के अलगाववादी नेताओं पर शिकंजा कसने लगा है। हिंसा के लिए आतंकी संगठनों से फंडिंग से लेकर कश्मीर समेत देश के कई अन्य हिस्सों में बेनामी संपत्तियों और हवाला के जरिए पैसों की हेराफेरी के मामले में एजेंसियां इनके खिलाफ सबूत खंगालने लगी हैं।
दिल्ली, जम्मू, नौशेरा, श्रीनगर समेत हर उस जगह पर छापेमारी करके नापाक साजिशों के सबूत इकठ्ठा किए जा रहे हैं जहां पर इन अलगाववादियों की गैरकानूनी साजिशों के निशान मिलने की उम्मीद है। इन सब के बीच गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है साथ ही पूछताछ का भी जिसमें दिल्ली की अदालत लगातार एजेंसियों को पूरा वक्त दे रही है।
दरअसल एनआईए अब कश्मीर में हिंसा के हालातों के लिए जिम्मेदार माने जा रहे अलगाववादियों की साजिश के हर उस राज पर से पर्दा उठाने की कोशिश में लगी है जिसने पिछले कई दशकों से आतंकी संगठनों और हवाला से मिले पैसों के लिए कश्मीर में आम जनजीवन को नुकसान पहुंचाया है।
सौ पेन ड्राइव्स से निकलेंगे कश्मीर में अलगाववाद की जड़ों के राज
एजेंसियां अब साजिश के हर राज की तह तक जाने में जुटी है। इस क्रम में अलगाववादियों के ठिकानों से मिले सबूतों, कागजों और डिजिटल डिवाइसेज की पूरी पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही अलगाववादियों के करीबियों के यहां भी मिले सबूतों को पूरी गहनता से जांचा जा रहा है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार एजेंसियां अलगाववादियों के ठिकानों से मिले 100 से ज्यादा पेन ड्राइव्स और हार्ड डिस्क में कश्मीर में हिंसा के लिए हुई साजिश और इसके विदेशी कनेक्शन के राज खंगालने में जुटी है। एजेंसियां इस बात की भी तस्दीक करने में जुटी हैं कि पाकिस्तान के किन आतंकी संगठनों ने कश्मीर में हिंसा के लिए इन्हें फंडिंग की है।
इसके साथ ही उन रास्तों और लोगों की भी पड़ताल हो रही है जिनके रास्ते कश्मीर में नापाक फंडिंग से मिले पैसों को पहुंचाया जाता था। इन सब के बीच सबूतों के जुड़ते तारों के बीच जांच जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अलगाववादियों की मुश्किलें बढेंगी।
आरोप साबित हुए तो जमानत भी मिलना हो जाएगा मुश्किल
कश्मीर में कई सालों से हुई हिंसा के हालातों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले अलगाववादियों के खिलाफ लगातार मिलते सबूतों और पाकिस्तान की शह पर काम करने की जो बातें सामने आ रही है वो ये कह सकती हैं कि एजेंसियों को इनके खिलाफ दायर केस में काफी मजबूती मिलने लगी है।
विदेशी मुद्रा के गैरकानूनी इस्तेमाल, हवाला के जरिए पैसों के लेनदेन, आतंकी संगठनों से कनेक्शन, हिंसा की साजिश समेत तमाम ऐसे मामले हैं जिनपर एजेंसियों ने सबूतों को इकठ्ठा करना शुरू कर दिया है।
इन स्थितियों में ये कहा जाने लगा है कि आने वाले समय में एजेंसियों के कसते शिकंजे से अलगाववादियों का निकल पाना बेहद मुश्किल होगा। वहीं दूसरी ओर लगे आरोपों के साबित होने की स्थिति में दोषियों को लंबी सजा भी होने की पूरी संभावना है।
कानून से बचने के लिए शुरू हुई वकीलों की तलाश
हुर्रियत के तमाम नेताओं पर कसते शिकंजे को देखते हुए कश्मीरी अलगाववादियों ने कानून से बचने के संभव रास्ते तलाशना शुरू कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अलगाववादी नेता उन अधिवक्ताओं की तलाश में हैं जो कि कश्मीर से जुड़े मामलों की जानकारी रखते हैं।
सूत्रों के मुताबिक अलगाववादियों ने कुछ नामी वकीलों से संपर्क भी किया है जिन्हें कि वे कश्मीरी अलगाववाद के प्रति 'सॉफ्ट कॉर्नर' रखने वाला मानते हैं। दरअसल अलगाववादी भी एजेंसियों की उस प्रभावी कार्रवाई से डरने लगे हैं जो कि पिछले कई दिनों से जारी है और इसी क्रम में श्रीनगर से दिल्ली तक ऐसे वकीलों की तलाश जारी है जो कि अदालत में पूरी मजबूती से इनका पक्ष रख सकें।