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SKUAST Kisan Mela: हिमाचल के बाद अब जम्मू-कश्मीर में भी होगी हींग की खेती

Sat, 19 Nov 2022 03:27 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sat, 19 Nov 2022 03:27 PM IST
सार

मौजूदा समय में हींग की जरूरत को पूरा करने के लिए अफगानिस्तान, ईरान और तुर्कीस्तान से अरबो रुपये का हिंग खरीदा जाता है। 

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After Himachal now asafetida be cultivated in Jammu Kashmir as well
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विस्तार

हिमाचल के लाहौल स्पीति के बाद अब प्रदेश के ठंडे इलाकों में हींग की खेती होगी। इसके लिए हींग के पौधे अगले साल वितरित किए जाएंगे। किसान खेतों में इसकी बीजाई कर सकेंगे। मौजूदा समय में हींग की जरूरत को पूरा करने के लिए अफगानिस्तान, ईरान और तुर्कीस्तान से अरबो रुपये का हिंग खरीदा जाता है। 

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प्रदेश ही नहीं अपितु देश में हिंग की खेती कम होती है। यहां से देश की जरूरत पूरी नहीं हो पाती है। स्कॉस्ट जम्मू ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। स्कॉस्ट जम्मू के अनुसार इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। 
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हींग की खेती ठंडे इलाकों में होती है। इसके लिए कश्मीर घाटी समेत जम्मू संभाग की कई जगहों में अपार संभावनाएं हैं। इस पर स्कॉस्ट जम्मू की ओर से अब हिंग उगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। खेती होने के बाद किसान अच्छी आय अन्य फसलों के मुकाबले अर्जित कर सकेंगे। 
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एक पौधे देता है एक किलो हींग 
एक पौध में एक किलो हींग का उत्पादन होता है। खाली जगहों पर हींग की खेती कर अच्छी आय अर्जित होती है। स्कॉस्ट जम्मू बीजाई के लिए पौधे मंगवाएगा। मौजूदा समय में बाजारों में एक किलो हींग की कीमत करीब 35 हजार रुपये है।   

यह है खासियत
हींग तेज गंध वाला पदार्थ होता है। यह खाने में सुगंध और स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें औषधीय गुण भी है। यह पेट की बीमारियों में आराम देता है। 

हींग के एक पौधे की आयु पांच साल होती है। पांच साल के बाद नए पौधे किसानों को लगाने होते है। 

पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर अब प्रदेश में भी हींग की खेती पर जोर दिया जाएगा। इससे किसान अच्छी आय अर्जित कर सकेंगे। अन्य फसलों की अपेक्षा किसान ज्यादा लाभान्वित होंगे। इस पर काम करना आरंभ कर दिया गया है। - जेपी शर्मा, वीसी, स्कॉस्ट जम्मू।

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