अफस्पा का मामला सुरक्षा एजेंसियों का: जितेंद्र सिंह
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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को हटाना एक ऐसा मामला है जिस पर निर्णय राजनेताओं की बजाय सुरक्षा एजेंसियों को करना चाहिए।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने यहां कश्मीरी पंडितों के एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा, ‘इसका (अफ्सपा को हटाना) निर्णय करने का विशेषाधिकार सुरक्षा बलों को है कि ऐसे उपायों को रहना चाहिए या जाना चाहिए।’
सिंह ने अफ्सपा को हटाने के बारे में प्रदेश कांग्रेस प्रमुख सैफूद्दीन सोज एवं अन्य की मांग के बारे में पूछे गए एक सवाल का उत्तर देते हुए कहा, ‘यह हमारे लिए टिप्पणी करने का मामला नहीं है। यह सुरक्षा का मामला है।’
पी चिदंबरम भी बता चुके हैं अफ्सपा को एक ‘अप्रिय कानून’
उन्होंने कहा, ‘यह राजनेताओं या राजनीतिक पार्टियों का विशेषाधिकार नहीं है।’ पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम द्वारा अफ्सपा को एक ‘अप्रिय कानून’ बताये जाने के दो दिन बाद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सोज ने कल कहा कि इस कानून को जम्मू कश्मीर में हटाये जाने की जरूरत है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें इसकी (अफ्सपा) अब जरूरत नहीं है तथा सेना के जनरलों से चर्चा करने के बाद इसे हटा लिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री एवं एकीकृत कमान के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की है कि वह सेना के जनरलों और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों से सलाह मशविरा किये बिना ही अफ्सपा को हटा देंगे।
भाजपा द्वारा कश्मीरी पंडितों के वोटों का ध्रुवीकरण करने के आरोप के बारे में पूछे गए एक सवाल पर सिंह ने कहा, ‘इसमें क्या आपत्ति है कि कोई समुदाय भाजपा को समर्थन की इच्छा रखे, चाहे वह कश्मीरी पंडित ही क्यों ना हो। आपत्ति क्या है। इसमें यदि कोई आपत्ति होनी चाहिए तो यह होनी चाहिए कि कश्मीरी पंडित उनका समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं।’