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यूटी बनने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में तैनात रहेंगे अतिरिक्त सुरक्षा बल, यह बनी सबसे बड़ी चुनौती
Fri, 25 Oct 2019 10:04 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Fri, 25 Oct 2019 10:04 AM IST
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भारतीय सुरक्षाबल (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर जम्मू कश्मीर में तैनात एक लाख अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती फिलहाल कायम रहेगी। 31 अक्तूबर के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश के रूप में प्रभावी हो जाएंगे। इसके बाद कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे।
ऐसे में दोनों प्रदेशों में कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती रहेगी। जिससे निपटने के लिए इन अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता पड़ेगी। सूत्रों का कहना है कि अभी अगला एक महीना अतिरिक्त कर्मी अपनी पोजिशन पर ही रहेंगे। इसके बाद सरकार समीक्षा करेगी कि इनको वापस भेजना है या नहीं।
केंद्र को आशंका है कि 31 अक्तूबर को दो नए केंद्र शासित प्रदेश बनने से सुरक्षा की नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जरूरी होगी। यह कर्मी अभी वहीं पर हैं, यहां इनको दो महीने पहले तैनात किया गया था। यह कर्मी एक ही जगह पोजिशन लिए हुए हैं।
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पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी कर्मियों को वापस भेजना संभव नहीं। क्योंकि 31 अक्तूबर के बाद काफी कुछ बदलाव होना है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती रहेगी। इसके लिए इन अतिरिक्त कर्मियों का रहना आवश्यक है। प्रशासनिक गतिविधियों को पूर्ण रूप से चलाने और इनको प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र की जरूरत है। इसलिए इनको अभी वापस भेजना संभव नजर नहीं आ रहा।
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ऐसे में दोनों प्रदेशों में कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती रहेगी। जिससे निपटने के लिए इन अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता पड़ेगी। सूत्रों का कहना है कि अभी अगला एक महीना अतिरिक्त कर्मी अपनी पोजिशन पर ही रहेंगे। इसके बाद सरकार समीक्षा करेगी कि इनको वापस भेजना है या नहीं।
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केंद्र को आशंका है कि 31 अक्तूबर को दो नए केंद्र शासित प्रदेश बनने से सुरक्षा की नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जरूरी होगी। यह कर्मी अभी वहीं पर हैं, यहां इनको दो महीने पहले तैनात किया गया था। यह कर्मी एक ही जगह पोजिशन लिए हुए हैं।
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पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी कर्मियों को वापस भेजना संभव नहीं। क्योंकि 31 अक्तूबर के बाद काफी कुछ बदलाव होना है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती रहेगी। इसके लिए इन अतिरिक्त कर्मियों का रहना आवश्यक है। प्रशासनिक गतिविधियों को पूर्ण रूप से चलाने और इनको प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र की जरूरत है। इसलिए इनको अभी वापस भेजना संभव नजर नहीं आ रहा।
आतंकियों के खात्मे तक रह सकते हैं
सूत्रों का कहना है कि कश्मीर को पूरी तरह से आतंक मुक्त बनाने तक इन अतिरिक्त कर्मियों को तैनात रखा जा सकता है। अब कश्मीर में आतंक के बड़े कमांडर भी नहीं हैं। आपरेशन आल आउट के तहत सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के पूरी तरह से खात्मे का प्लान बना रही हैं। जिसमें इन अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता पड़ेगी। पहले से मौजूद सुरक्षा तंत्र को आतंकवाद से लड़ने के साथ-साथ कानून व्यवस्था से निपटने के लिए योगदान देना पड़ता है। अब इन अतिरिक्त कर्मियों की मदद से आतंकवाद के खिलाफ मौजूदा तंत्र पूरी तरह से जोरदार प्रहार करेगा।
सूत्रों का कहना है कि कश्मीर को पूरी तरह से आतंक मुक्त बनाने तक इन अतिरिक्त कर्मियों को तैनात रखा जा सकता है। अब कश्मीर में आतंक के बड़े कमांडर भी नहीं हैं। आपरेशन आल आउट के तहत सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के पूरी तरह से खात्मे का प्लान बना रही हैं। जिसमें इन अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता पड़ेगी। पहले से मौजूद सुरक्षा तंत्र को आतंकवाद से लड़ने के साथ-साथ कानून व्यवस्था से निपटने के लिए योगदान देना पड़ता है। अब इन अतिरिक्त कर्मियों की मदद से आतंकवाद के खिलाफ मौजूदा तंत्र पूरी तरह से जोरदार प्रहार करेगा।