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फेल होने से जिसने जान दी, वह तो टॉपर निकला
Updated Sat, 14 Nov 2015 11:44 AM IST
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कहा कि अदनान घर-परिवार में और सभी दोस्तों से बार-बार कहता था कि फिजिक्स में उसने सभी सवालों के सही जवाब दिए हैं। वो फेल नहीं हो सकता।
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गिल्कार बताते हैं कि फिजिक्स की परीक्षा देने के बाद जब शाम को अदनान घर लौटा था तब भी उसने बताया था कि उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है। गिल्कार बताते हैं कि उनके बेटे की मौत के बाद उन्होंने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था।
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उन्हें भरोसा था कि उनका बेटा फेल नहीं हो सकता। गिल्कार कहते हैं कि सिस्टम में कुछ लोगों की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान चली गई।
गिल्कार कहते हैं कि अब पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट में अदनान के पास होने से यह साबित होता है कि उसने खुदकुशी नहीं की बल्कि उसकी ‘हत्या’ हुई है।
उन्हाने मांग की कि जो भी लोग इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ सर्विस रूल्स के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। गिल्कार के मामले में अपनी गलती को स्वीकार करते हुए जम्म-कश्मीर स्टेट बोर्ड आफ टेक्निकल एजूकेशन के सचिव हुसैन मलिक कहते हैं कि अकेले अदनान के मामले में ऐसा नहीं हुआ था।
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कई अन्य छात्रों के रिजल्ट में भी गलती हुई थी। मलिक कहते हैं कि ऐसा अन्य विश्वविद्यालयों में भी कई बार हो जाता है। शिक्षा मंत्री नईम अख्तर से पूछे जाने पर उनका कहना था कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।