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मॉडल विलेज बनने के 13 साल बाद भी सड़क से नहीं जुड़ा सलवा
Updated Mon, 28 May 2018 12:51 AM IST
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पुंछ। केंद्र एवं राज्य सरकार की तरफ से लोगों को हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाने के भले ही वादे किए जाते हों, लेकिन जमीनी स्तर पर सच्चाई इस दावे की पोल खोल देती है। देश की आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी जिले की मेंढर तहसील में बसे गांव चौकी सलवा के ग्रामीणों को गांव तक पक्की सड़क उपलब्ध नहीं हो पाई है। इससे हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं।
गांव के दसवीं कक्षा से आगे पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को हर दिन कई किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल आना-जाना पड़ता है। गांव में किसी के बीमार होने अथवा गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर चारपाई पर उठा कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। गांव निवासियों शबीर हुसैन, अरशद हुसैन, इफ्तिखार शबनम आदि का कहना है कि प्रशासन एवं सरकार की तरफ से सलवा को मॉडल विलेज बनाए जाने के 13 साल बाद भी यह गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। गांव में गाड़ियां नहीं आती हैं, ऐसे में लोगों को बाजार से राशन, सब्जी और अन्य सामान घर तक कंधे पर उठा कर लाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में होती है। ऐसे में उनको पालकी या फिर कंधे पर उठा कर गांव से 10-12 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, जहां से अस्पताल पहुंचाने तक कई बार गंभीर हालत में व्यक्ति की मौत हो जाती है।
जहां तक सड़क की कटाई की गई है, वहां तक सड़क को पक्का किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव तक इस सड़क को पक्की करवाया जाए। सलवा की तीन पंचायतों की इस सड़क का प्रयोग हजारों लोगों को करना पड़ता है। गांव के लिए टाटा सूमो चलाने वाले शौकत और अशफाक का कहना है कि जब गांव के लिए सड़क बनाने का काम शुरू हुआ था, तो उन्होंने रोजगार के लिए टाटा सूमो खरीदी थी, लेकिन कच्ची एवं खस्ताहाल सड़क के कारण हम जो कमाते हैं, वह गाड़ियों की मरम्मत पर ही खर्च करना पड़ता है। ऐसे में हमारे ऊपर बैंकों का कर्जा काफी बढ़ गया। यदि सड़क पक्की कर दी जाए, तो हम अपना पेट पालने के साथ बैंकों का लोन भी चुका सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में गांव चौकी सलवा के आमिर बशीर ने प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर गांव का नाम रोशन किया है। ऐसे में ग्रामीणों को इस बात की उम्मीद बंधी है कि शायद बशीर उनके गांव को सड़क की सुविधा उपलब्ध करवा दे।
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गांव के दसवीं कक्षा से आगे पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को हर दिन कई किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल आना-जाना पड़ता है। गांव में किसी के बीमार होने अथवा गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर चारपाई पर उठा कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। गांव निवासियों शबीर हुसैन, अरशद हुसैन, इफ्तिखार शबनम आदि का कहना है कि प्रशासन एवं सरकार की तरफ से सलवा को मॉडल विलेज बनाए जाने के 13 साल बाद भी यह गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। गांव में गाड़ियां नहीं आती हैं, ऐसे में लोगों को बाजार से राशन, सब्जी और अन्य सामान घर तक कंधे पर उठा कर लाना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में होती है। ऐसे में उनको पालकी या फिर कंधे पर उठा कर गांव से 10-12 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, जहां से अस्पताल पहुंचाने तक कई बार गंभीर हालत में व्यक्ति की मौत हो जाती है।
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जहां तक सड़क की कटाई की गई है, वहां तक सड़क को पक्का किया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव तक इस सड़क को पक्की करवाया जाए। सलवा की तीन पंचायतों की इस सड़क का प्रयोग हजारों लोगों को करना पड़ता है। गांव के लिए टाटा सूमो चलाने वाले शौकत और अशफाक का कहना है कि जब गांव के लिए सड़क बनाने का काम शुरू हुआ था, तो उन्होंने रोजगार के लिए टाटा सूमो खरीदी थी, लेकिन कच्ची एवं खस्ताहाल सड़क के कारण हम जो कमाते हैं, वह गाड़ियों की मरम्मत पर ही खर्च करना पड़ता है। ऐसे में हमारे ऊपर बैंकों का कर्जा काफी बढ़ गया। यदि सड़क पक्की कर दी जाए, तो हम अपना पेट पालने के साथ बैंकों का लोन भी चुका सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में गांव चौकी सलवा के आमिर बशीर ने प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर गांव का नाम रोशन किया है। ऐसे में ग्रामीणों को इस बात की उम्मीद बंधी है कि शायद बशीर उनके गांव को सड़क की सुविधा उपलब्ध करवा दे।
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