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450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन अगस्त से

Fri, 16 Jan 2015 08:49 PM IST
Updated Fri, 16 Jan 2015 08:49 PM IST
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450 mw hydro power production from august

बिजली कमी से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में 450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन क्षमता की बगलिहार-टू परियोजना संकटमोचक बनेगी। रामबन जिले में चिनाब (चंद्रभागा) दरिया पर स्टेट सेक्टर के अंतर्गत बन रही रियासत की अपनी इस प्रतिष्ठित परियोजना से इस साल अगस्त में बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।

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मौजूदा समय में बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर एक हजार मेगावाट से भी ज्यादा का हो चुका है। ऐसे में इस परियोजना से बिजली संकट में बड़ी राहत मिलेगी। जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन की ओर से निर्माणाधीन बगलिहार-टू परियोजना में 150 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता की तीन यूनिट होंगी।

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31 अगस्त से पहले उत्पादन शुरू

450 mw hydro power production from august

3113.19 करोड़ रुपये से निर्माणाधीन इस परियोजना पर निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है और 31 अगस्त से पहले बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। कारपोरेशन के प्रबंधक निदेशक मेहराज अहमद काकरू का कहना है कि जम्मू कश्मीर के लिए बगलिहार-टू परियोजना काफी प्रतिष्ठित है।

इसका कारण यह है कि बगलिहार एक के बाद स्टेट सेक्टर के अंतर्गत यह दूसरी बड़ी 450 मेगावाट बिजली उत्पादन की परियोजना है। निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है और अगस्त में परियोजना की एक यूनिट को चालू कर दिया जाएगा। इसके बाद बाकी दो यूनिटों को भी शुरू किया जाएगा। बगलिहार-टू परियोजना से रियासत में बिजली परिदृश्य में सुधार लाने में बड़ी मदद मिलेगी।

स्टेट सेक्टर की परियोजनाओं की क्षमता 758 मेगावाट ही

450 mw hydro power production from august

रियासत में अब तक स्टेट सेक्टर की परियोजनाओं की कुल क्षमता 758.70 मेगावाट तक ही पहुंच पाई है। इनमें प्रमुख रूप से 450 मेगावाट की बगलिहार-एक परियोजना शामिल है। अन्य परियोजनाओं की क्षमता काफी कम है।

इनमें लोअर झेलम 105 मेगावाट, अपर सिंध-एक 22.6, अपर सिंध-दो 105, गांदरबल 15 मेगावाट, चिनैनी-एक 23.30, चिनैनी-टू दो मेगावाट, चिनैनी-थ्री 7.50 मेगावाट, सेवा तीन नौ मेगावाट शामिल है, जबकि केंद्रीय सेक्टर में चल रही परियोजनाओं की क्षमता 1920 मेगावाट की है।

70 फीसदी बिजली उत्तरी ग्रिड से ली जा रही
रियासत में बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर 1000 मेगावाट को पार कर चुका है। इस वजह से बिजली उपभोक्ताओं को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। इंडस्ट्री को भी काफी नुकसान होता है।

मौजूदा समय में पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन की क्षमता से एक-तिहाई उत्पादन ही हो रहा है। इस वजह से करीब 70 फीसदी बिजली उत्तरी ग्रिड से खरीदी जा रही है। इसके बावजूद भी आठ से लेकर 12 घंटे तक की बिजली कटौती उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ रही है।

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