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जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में अब 33 फीसदी स्थानीय अफसर ही बनेंगे आईएएस-आईपीएस
Tue, 07 Jan 2020 09:08 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 07 Jan 2020 09:08 PM IST
सार
- केंद्र सरकार ने घटाया कोटा, पहले 50 फीसदी स्थानीय अफसर चुने जाते थे प्रोन्नति के जरिये
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- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस सेवाओं में दोनों नवगठित केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए स्थानीय कोटे में कटौती कर दी है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अब 50 के बजाय महज 33 फीसदी स्थानीय अधिकारियों को ही मौका दिया जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि इस निर्णय को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर लिए गए और जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी हो जाएगा। यह कदम पिछले साल अगस्त में अशांत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के खात्मे की ही अगली कड़ी है।
बता दें कि अभी तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) में जम्मू-कश्मीर कैडर के लिए 50-50 फीसदी कोटे का प्रावधान था।
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इसके तहत 50 फीसदी भर्ती केंद्रीय लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के जरिये सीधे होती थी और शेष 50 फीसदी अधिकारी राज्य स्तरीय सेवाओं से प्रोन्नति के जरिये आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस बनते थे। लेकिन विशेष दर्जा खत्म होने के बाद वहां भी शेष भारत की तरह ही नियम-कानून लागू किए जा रहे हैं।
अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल भारत के दूसरे राज्यों में 67:33 के अनुपात में कोटा होता था इनमें 67 फीसदी अधिकारी यूपीएससी के जरिये और शेष 33 फीसदी अधिकारी स्थानीय सेवाओं में से प्रोन्नति के जरिये आते हैं।
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अधिकारी ने कहा कि इस निर्णय को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर लिए गए और जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी हो जाएगा। यह कदम पिछले साल अगस्त में अशांत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के खात्मे की ही अगली कड़ी है।
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बता दें कि अभी तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) में जम्मू-कश्मीर कैडर के लिए 50-50 फीसदी कोटे का प्रावधान था।
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इसके तहत 50 फीसदी भर्ती केंद्रीय लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के जरिये सीधे होती थी और शेष 50 फीसदी अधिकारी राज्य स्तरीय सेवाओं से प्रोन्नति के जरिये आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस बनते थे। लेकिन विशेष दर्जा खत्म होने के बाद वहां भी शेष भारत की तरह ही नियम-कानून लागू किए जा रहे हैं।
अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल भारत के दूसरे राज्यों में 67:33 के अनुपात में कोटा होता था इनमें 67 फीसदी अधिकारी यूपीएससी के जरिये और शेष 33 फीसदी अधिकारी स्थानीय सेवाओं में से प्रोन्नति के जरिये आते हैं।
राज्य पुनर्गठन के साथ ही बदला कैडर का भी नाम
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 के तहत दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसेवा आयोग के जरिये आने वाले अधिकारियों के कैडर का भी नाम बदल गया है। अब ये अधिकारी जम्मू-कश्मीर कैडर के बजाय अगमुत (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेशों) कैडर से संबंधित माने जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 के तहत दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसेवा आयोग के जरिये आने वाले अधिकारियों के कैडर का भी नाम बदल गया है। अब ये अधिकारी जम्मू-कश्मीर कैडर के बजाय अगमुत (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेशों) कैडर से संबंधित माने जाएंगे।