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कश्मीर: फर्जी मुठभेड़ में 7 सैनिकों को उम्रकैद

Thu, 13 Nov 2014 08:25 PM IST
Updated Thu, 13 Nov 2014 08:25 PM IST
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2010 Machil Fake Encounter Case - Life Sentence for 7 Soilders

2010 के एक फर्जी एनकाउंटर मामले में सेना ने बड़ा फैसला दिया है। सेना ने अपने दो अधिकारियों समेत सात जवानों को फर्जी एनकाउंटर का दोषी पाया है। सभी आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। बता दें कि कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में 2010 में यह फर्जी एनकाउंटर किया गया था।

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2010 में बारामुला के नदिहाल जिले के मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद शामिल को सीमावर्ती इलाके में सेना के जवानों ने एनकाउंटर में मार गिराया था। सेना के जवानों का कहना था कि तीनों युवक पाकिस्तानी आतंकवादी थे जो भारतीय सीमा में आतंक फैलाने की मंशा से दाखिल हुए थे।
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नादिहाल गांव के लोगों का आरोप है कि सेना ने इलाके के तीन लोगों को आतंकी बताकर उनका एनकाउंटर कर दिया जबकि घरवालों ने तीन दिन पहले उनकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था। बाद में उन तीनों की कब्रें खोदकर शवों को बाहर निकाला गया, जिसे घरवालों ने पहचान लिया।

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बचाव में सेना ने कहा आतंकी थे तीनों

2010 Machil Fake Encounter Case - Life Sentence for 7 Soilders

पूरा मामला 30 अप्रैल 2010 को शुरू हुआ। 30 अप्रैल को सेना ने कुपवाड़ा में तीन लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया। बताया गया कि ये लोग एलओसी से घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। सेना ने इन लाशों को पुलिस के हवाले कर दिया, जिन्हें दफना दिया गया।

मामले में जांच हुई तो पता चला कि इस एनकाउंटर से तीन दिन पहले यानी 27 अप्रैल को बारामूला में कुछ लोगों ने इलाके के तीन लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब ये साफ हो चुका था कि गायब हुए लोगों का एनकाउंटर कर दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की रिपोर्ट में 4 राजपूत रेजिमेंट के कमांडिंग अफसर कर्नल डी. के. पठानिया और इसी रेजिमेंट के मेजर उपिंदर का नाम 30 अप्रैल को हुए इस मच्छल एनकाउंटर के प्रमुख आरोपियों में आया।

सेना ने 30 अप्रैल को बयान जारी किया था कि उसने तीन अज्ञात घुसपैठियों को एलओसी से सटे मच्छल सेक्टर में मार गिराया। बाद में अपने बचाव में सेना ने दावा किया कि वे पाकिस्तानी आतंकवादी थे।

मामले में मारे गए थे 110 से ज्यादा लोग

2010 Machil Fake Encounter Case - Life Sentence for 7 Soilders

मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद को कथित रूप से बॉर्डर के पास आने के लिए ललचाया गया और फिर एनकाउंटर में मार गिराया गया। इनके घरवालों की शिकायत पर टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान अब्बास और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब्बास ने पुलिस को मेजर उपिंदर के इसमें शामिल होने की बात बताई।

पुलिस ने रिपोर्ट में मेजर पर आरोप लगाया कि उन्होंने तीन लड़कों को मारने के लिए स्‍थानीय लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और उन्हें आतंकवादियों का तमगा दे दिया। इससे पहले भी 33 राष्ट्रीय राइफल्स के कर्नल ग्लोरिया को घाटी से हटाया गया था।

उन पर आरोप था कि उन्होंने फरवरी 2006 में हंडवाड़ा के एक प्लेग्राउंड में क्रिकेट खेल रहे तीन लड़कों को मार डाला था। मामले से घाटी में इतनी अशांति फैली थी कि इसके विरोध में हुए प्रदर्शनों में घाटी के करीब 110 लोगों की जान चली गई थी।

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