फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने बनाया लुभावना बजट

चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने बनाया लुभावना बजट

विज्ञापन
चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने बनाया लुभावना बजट
कठुआ। केंद्र सरकार की तरफ से पेश किए गए अंतरिम बजट को जिले में ज्यादातर लोगों ने आगामी चुनावों के मद्देनजर तैयार किया गया लुभावना बजट करार दिया है। हालांकि बजट में आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने से नौकरीपेशा व निमभन मध्यवर्ग के लोग काफी खुश नजर आए। साल में साढ़े छह लाख रुपये तक कमाने वाले लोग पीएफ और सेविंग के माध्यम से टैक्स बचा सकते हैं। ऐसे ही बजट में कुछ अन्य घोषणाएं भी हैं, जिन पर लोगों ने खुशी जाहिर की है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को तीन हजार रुपये की पेंशन दी जाएगी। महंगाई पर रोक लगाने के लिहाज से महिलाओं ने सरकार के इस बजट को पूरी तरह फेल बताया है।
विज्ञापन

केशव गुप्ता ने बताया कि मोदी सरकार का यह बजट ऊपरी तौर पर मध्मय वर्ग के लोगों को लुभा रहा है, लेकिन यदि गहराई से इसका विश्लेषण किया जाए तो इससे कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। किसानों के लिए इस बजट में खास कुछ नहीं है। अब चूंकि लोग बजट को भी ध्यान से नहीं देखते हैं, इसलिए लोग बस सरकार की तारीफ करने में लगे हैं। लोगों को सरकार के निर्णय से विमुख होना खतरनाक संकेत है।
विज्ञापन

प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत किसानों के खाते में सालाना 6000 रुपये डालने को किसान नेता शिवदेव सिंह ने लालीपॉप बताया है। उन्होंने कहा कि देश में किसानों की असल समस्याओं को दूर करने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस समय पूरे देश में सरकार की इतनी किरकिरी हुई है, इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने लोकलुभावन बजट तैयार किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यदि सरकार को वाकई किसानों की चिंता थी तो उसने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने पर अब तक कोई एलान क्यों नहीं किया। किसानों को फसल बीमा के नाम पर लूटा जा रहा है, लेकिन जो पूंजीपति इससे जुड़े हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसानों की कर्जमाफी के लिए लिए सरकार के बजट में कुछ नहीं है। मौसम और जंगली जानवरों की वजह से बर्बाद हुई फसलों का सरकार मुआवजा नहीं देती है, लेकिन फसल बीमा के नाम पर उनसे पैसे लिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त भूमिहीन किसानों के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं है। सरकार की ओर से मिलने वाली राशि किसानों के खाद, बीज और अन्य खर्चों का वहन नहीं कर सकती है।

रोजगार के मुद्दे पर सरकार फेल
सरकार ने इस बजट में विद्यार्थियों के लिए कुछ नहीं किया। मोदी सरकार हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देना का वादा किया था, जिसमें वह फेल रही। इस बजट में भी रोजगार बढ़ाने और छंटनी पर रोक लगाने जैसे अहम मसलों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन के प्रावधान से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन यह अभी देखना बाकी है कि जमीनी स्तर पर इसका कितना लाभ मिलता है।
-नरेश कुमार, बेरोजगार युवा

मध्यम वर्ग के लिए राहत
सरकार का इस वर्ष का बजट मध्यम वर्ग के लोगों के लिए लाभप्रद है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के साथ मध्यम वर्ग के लोगों को टैक्स से अब छूट होगी और इससे उनकी बचत भी होगी। स्टैडर्ड डिडक्शन को बढ़ाने का फैसला भी मध्मय वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचाएगा। इसके साथ ही टैक्स के लिए मेगा पेंशन स्कीम और किसानों के लिए भी बजट लाभकारी है। इस बजट से किसी भी वर्ग को कोई नुकसान नहीं होगा।
डा. मनोहर लाल, एसोसिएट प्रोफेसर


बिलावर
पेंशनरों के लिए केंद्र सरकार ने अच्छा फैसला किया है। ग्रैच्युटी में दस लाख की वृद्धि से लोगों को लाभ होगा। केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बारे में भी विचार किया है और ऐसे में इस बजट से पेंशन धारकों को भी लाभ मिलेगा।
-रमेश चंद्र, बिलावर

किसानों के लिए बजट में 6000 रुपये का प्रावधान, सरकार का अच्छा फैसला है। इससे खासकर छोटे किसानों को राहत मिलेगी। हालांकि कृषि उपकरणों, खाद, कीटनाशक आदि के दाम पहले ही काफी बढ़े हुए हैं। इस दिशा में भी सरकार को कुछ करना चाहिए था।
-गोपाल सिंह, किसान

राज सिंह, मनरेगा श्रमिक
बजट में श्रमिकों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद प्रतिमाह 3000 रुपये पेंशन देने का फैसला केंद्र सरकार का अच्छा कदम है। इससे देश व राज्य के लाखों मजदूरों को लाभ मिलेगा।

पांच लाख तक कोई भी टैक्स न होने से मध्यम वर्ग के व्यापारियों को फायदा होगा। हालांकि पहले की जीएसटी ने कारोबारियों की कमर तोड़ कर रख दी है। इस दिशा में कुछ ठोस नहीं कहा गया है।
-पुरुषोत्तम कुमार, फर्नीचर व्यवसायी
केंद्र सरकार ने बजट में पढ़े-लिखे बेरोजगारों के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की है। सरकार से मासिक बेरोजगारी भत्ते की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसे में बेरोजगार युवा बजट से निराश हुए हैं।
-मनोज कुमार, बेरोजगार युवा

सरकार ने टैक्स से राहत देकर बड़ा काम किया है। टैक्स दाताओं की 80 प्रतिशत बढ़ोतरी से जो पैसा सरकार को मिलेगा सरकार उसे तरक्की के कामों में लगाएगी।
-अनीता, कर्मचारी, लोक निर्माण विभाग

बसोहली
बजट में खानापूर्ति की गई है। इस समय महंगाई की मार से हर कोई परेशान है। बजट में महंगाई को कम करने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में देश की गरीब गुरबा आदमी की जिंदगी पहले से और कठिन हो जाएगी।
-अनिल पाधा, बसोहली
सरकार ने पढे़ लिखे नौजवानों के लिए बजट में कुछ नहीं दिया। दिहाड़ीदारों, आंगनबाड़ी वर्कर्स को नजरअंदाज किया है। बजट में मुलाजिमों के एक तबके व उद्योगपतियों को खुश करने की कोशिश की गई है। बजट में आम लोगों को कोई राहत नहीं दी गई है।
-राजा रफीक

यह बजट आम आदमी का बजट है। एक मध्यम वर्गीय परिवार को पांच लाख तक की आय को टैक्स मुक्त करना बड़ा कदम है। ग्रेच्युटी को 10 लाख से 20 लाख तक करना भी सराहनीय कदम है। किसानों और उद्योगपतियों के लिए बजट में अच्छे फैसले लिए गए हैं।
-साहिल शर्मा

लोगों को उम्मीद थी कि मोदी सरकार का यह बजट आम लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में मोदी सरकार ने जिस बजट को आगामी चुनावों को ध्यान में रख कर तैयार किया है, वह उसके लिए उल्टा साबित हो सकता है। अब लोग लुभावनी बातों में नहीं आने वाले हैं।
-अंकित शर्मा

कामगार पेंशन को बताया मोदी सरकार का एक और जुमला
कहा, श्रम कानूनों को कमजोर करने से सरकार की योजनाओं का नहीं मिल पाता लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
हीरानगर। बजट में गैर संगठित क्षेत्र के कामगारों को 60 साल की आयु के बाद तीन हजार रुपये पेंशन की जो बात कही गई है, वह मोदी सरकार का एक और जुमला है। इस तरह की घोषणाएं पहले भी कई बार बजट में हो चुकी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों को कुछ नहीं मिला। ये बातें बिल्डिंग और अन्य मजदूरों के बीच काम करने वाले वामपंथी नेता कामरेड राजकुमार ने कही हैं।
उन्होंने कहा कि मेहनतकशों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ उन्हें तब तक नहीं मिल सकता, जब तक श्रम कानून को पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता। सच तो यह है कि केंद्र सरकार जुमलेबाजी कर लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। गरीब मजदूर वर्ग के लिए सबसे अहम श्रम कानून हैं, जिसे सरकार ने कमजोर किया है। इसके साथ बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। किसी भी देश की तरक्की के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बजट में बड़ा हिस्सा होना जरूरी है, लेकिन मोदी सरकार ने बजट में सब गोलमाल किया है।

सीमांत कृषकों की सहायता के लिए सरकार छह हजार रुपये प्रति वर्ष राहत देगी। यह ऐतिहासिक फैसला है। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। यह राशि बेहद कम होने के बावजूद इस फैसले से छोटे गरीब किसानों का मनोबल बढ़ेगा। पाकिस्तान कभी भी संघर्ष विराम का उल्लंघन करता है जिसके चलते अक्सर किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं।

-जमीत सिंह, सीमांत किसान।
श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु के बाद तीन हजार रुपये पेंशन देने की घोषणा एक अहम फैसला है। मजदूर वर्ग को अक्सर बुढ़ापे में सहायता की बेहद जरूरत रहती है। ऐसे में पेंशन का एलान ऐतिहासिक कदम है। हालांकि सरकार को भविष्य में इस राशि को और बढ़ाना चाहिए।
-लेखराज, मार्बल टाइल मिस्त्री।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed