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‘मैंने कश्मीर को नहीं, कश्मीर ने मुझे चुना है’
दिल्ली
Updated Sat, 07 Sep 2013 01:40 PM IST
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विश्व विख्यात संगीतकार जुबिन मेहता को शुक्रवार को सांस्कृतिक सद्भाव के लिए प्रतिष्ठित टैगोर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें इस अवार्ड से नवाजा। मशहूर सितार वादक स्वर्गीय पंडित रवि शंकर के बाद यह पुरस्कार पाने वाले मेहता दूसरे संगीतकार हैं।
वहीं, विवादों को दरकिनार करते हुए जुबिन शनिवार को जम्मू व कश्मीर के श्रीनगर में डल झील के किनारे अपना म्यूजिक कंसर्ट करने के फैसले पर कायम हैं।
उनका कहना है, ‘मैंने कश्मीर को नहीं बल्कि कश्मीर ने मुझे चुना है।’
लोगों की दुआएं मुझे मिलेंगी
बावरियां स्टेट ऑरकेस्ट्रा तैयार करने वाले मेहता ने शालीमार बाग में होने वाले कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया है।
उनका सिर्फ इतना कहना है कि मैं यहां पर संगीत का कार्यक्रम पेश करने आया हूं।
मेहता ने कहा, ‘मेरे पास विरोध करने वालों को कहने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं कश्मीर में कार्यक्रम को लेकर बहुत उत्सुक हूं।
उम्मीद है कि लोगों की दुआएं मुझे मिलेंगी।’
‘भारत का प्रतिष्ठित बेटा’
वेस्टर्न क्लासिक म्यूजिक में मास्टर 77 वर्षीय मेहता की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें ‘भारत का प्रतिष्ठित बेटा’ करार देते हुए देश का सांस्कृतिक राजदूत करार दिया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें एक स्वर्णिम पट्टिका, शाल, प्रशस्ति पत्र और एक करोड़ रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए गए।
प्रशस्ति पत्र में लिखा गया कि ओपेरा वर्ल्ड में किसी भी भारतीय ने वो मुकाम हासिल नहीं किया, जो जुबिन मेहता ने हासिल किया है।
इस विभाजित संसार में ऐसे कम ही लोग होते हैं, जो देश की सीमाओं से ऊपर उठ जाने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। जुबिन मेहता ऐसे ही लोगों में से एक हैं। हालांकि खुद को एक साधारण संगीतकार बताते हुए मेहता ने महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।
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उनके साथ आर्केस्ट्रा टीम के 80 सदस्य भी हैं। इस बीच आतंकवादी संगठनों की धमकियों के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कश्मीर के संतूर वादक को सुनेगी दुनिया
जब जुबीन मेहता कश्मीर की वादियों में अपनी संगीत की धुनों को बिखेर रहे होंगे तो उनका साथ कश्मीर का एक संतूर वादक अभय रूस्तम सोपारी करेगा।
जुबीन मेहता के साथ-साथ अभय रूस्तम सोपारी के सात मिनट के शो में दुनिया जान जाएगी।
जम्मू और कश्मीर के रहने वाले अभय का मानना है कि कश्मीर की अवाम ऐसे आयोजनों को चाहती है।
जो लोग ऐसे आयोजनों का विरोध करते हैं उन्हें अपना दिल बड़ा करना होगा।
अभय ने द हिदूं से बातचीत में कहा कि जर्मन एंबेंसी के इस आयोजन के मकसद के पीछे कोई राजनीति नहीं है।
ऐसे में जुबीन मेहता के साथ काम करना अपने आप में एक गौरव की बात है।
अभय के साथ उनकी पंद्रह लोगों की टीम जुबीन मेहता के कॉन्सर्ट के लिए संगीत की प्रस्तुति देगी।
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें इस अवार्ड से नवाजा। मशहूर सितार वादक स्वर्गीय पंडित रवि शंकर के बाद यह पुरस्कार पाने वाले मेहता दूसरे संगीतकार हैं।
वहीं, विवादों को दरकिनार करते हुए जुबिन शनिवार को जम्मू व कश्मीर के श्रीनगर में डल झील के किनारे अपना म्यूजिक कंसर्ट करने के फैसले पर कायम हैं।
उनका कहना है, ‘मैंने कश्मीर को नहीं बल्कि कश्मीर ने मुझे चुना है।’
लोगों की दुआएं मुझे मिलेंगी
बावरियां स्टेट ऑरकेस्ट्रा तैयार करने वाले मेहता ने शालीमार बाग में होने वाले कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया है।
उनका सिर्फ इतना कहना है कि मैं यहां पर संगीत का कार्यक्रम पेश करने आया हूं।
मेहता ने कहा, ‘मेरे पास विरोध करने वालों को कहने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं कश्मीर में कार्यक्रम को लेकर बहुत उत्सुक हूं।
उम्मीद है कि लोगों की दुआएं मुझे मिलेंगी।’
‘भारत का प्रतिष्ठित बेटा’
वेस्टर्न क्लासिक म्यूजिक में मास्टर 77 वर्षीय मेहता की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें ‘भारत का प्रतिष्ठित बेटा’ करार देते हुए देश का सांस्कृतिक राजदूत करार दिया।
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राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें एक स्वर्णिम पट्टिका, शाल, प्रशस्ति पत्र और एक करोड़ रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए गए।
प्रशस्ति पत्र में लिखा गया कि ओपेरा वर्ल्ड में किसी भी भारतीय ने वो मुकाम हासिल नहीं किया, जो जुबिन मेहता ने हासिल किया है।
इस विभाजित संसार में ऐसे कम ही लोग होते हैं, जो देश की सीमाओं से ऊपर उठ जाने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। जुबिन मेहता ऐसे ही लोगों में से एक हैं। हालांकि खुद को एक साधारण संगीतकार बताते हुए मेहता ने महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की।
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उनके साथ आर्केस्ट्रा टीम के 80 सदस्य भी हैं। इस बीच आतंकवादी संगठनों की धमकियों के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कश्मीर के संतूर वादक को सुनेगी दुनिया
जब जुबीन मेहता कश्मीर की वादियों में अपनी संगीत की धुनों को बिखेर रहे होंगे तो उनका साथ कश्मीर का एक संतूर वादक अभय रूस्तम सोपारी करेगा।
जुबीन मेहता के साथ-साथ अभय रूस्तम सोपारी के सात मिनट के शो में दुनिया जान जाएगी।
जम्मू और कश्मीर के रहने वाले अभय का मानना है कि कश्मीर की अवाम ऐसे आयोजनों को चाहती है।
जो लोग ऐसे आयोजनों का विरोध करते हैं उन्हें अपना दिल बड़ा करना होगा।
अभय ने द हिदूं से बातचीत में कहा कि जर्मन एंबेंसी के इस आयोजन के मकसद के पीछे कोई राजनीति नहीं है।
ऐसे में जुबीन मेहता के साथ काम करना अपने आप में एक गौरव की बात है।
अभय के साथ उनकी पंद्रह लोगों की टीम जुबीन मेहता के कॉन्सर्ट के लिए संगीत की प्रस्तुति देगी।