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ग्रामीणों ने पंचैरी बस स्टैंड पर किया प्रदर्शन
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उधमपुर। पंचैरी के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे पैंथर्स पार्टी के पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने लांदर, कट्टी, लटियार, कुलटियार, पंचैरी व मीर आदि पंचायतों में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन कर लोगों से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात पर चर्चा की। वहीं सोमवार को उनके नेतृत्व में लोगों ने पंचैरी बस स्टैंड पर धरना-प्रदर्शन कर पंचैरी, लांदर भमाग को अलग विधानसभा क्षेत्र बनाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान मनकोटिया ने कहा कि जब तक पंचैरी तथा लांदर भमाग को अलग विधानसभा क्षेत्र नहीं बनाया जाता, तब तक इस इलाके का विकास नहीं हो सकता। क्योंकि यह दूरदराज का पहाड़ी इलाका, तीन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र उधमपुर, रियासी तथा चिनैनी के अधीन है। इसकी वजह से आज तक इसका उचित विकास नहीं हो पा रहा है। अब समय आ चुका है कि सभी लोग एकजुट होकर इसे एक अलग विधानसभा क्षेत्र बनाने के लिए संघर्ष करें, ताकि आने वाले समय में इस इलाके के लोगों को उनका अधिकार मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने हदबंदी आयोग के सदस्यों से भी अपील करते हुए कहा कि वह इस पूरे इलाके में जाकर लोगों की राय लें और उसके बाद ही कोई फैसला करें, ताकि इस दूरदराज पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को शहरी क्षेत्र का विधायक चुनकर फिर पांच वर्ष के लिए बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर उनके आगे गिड़गिड़ाना न पडे़। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर के गुरेज एरिया में 14 हजार मतदाता होने पर उसे विधानसभा क्षेत्र बनाया जा सकता है, तो इस पहाड़ी क्षेत्र में 40 हजार से ज्यादा वोटर होने पर इसे अलग विधानसभा क्षेत्र का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। इस मौके पर स्थानीय नेता सुरजीत सिंह तथा कई पंच-सरपंचों ने विचार रखे।
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प्रदर्शन के दौरान मनकोटिया ने कहा कि जब तक पंचैरी तथा लांदर भमाग को अलग विधानसभा क्षेत्र नहीं बनाया जाता, तब तक इस इलाके का विकास नहीं हो सकता। क्योंकि यह दूरदराज का पहाड़ी इलाका, तीन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र उधमपुर, रियासी तथा चिनैनी के अधीन है। इसकी वजह से आज तक इसका उचित विकास नहीं हो पा रहा है। अब समय आ चुका है कि सभी लोग एकजुट होकर इसे एक अलग विधानसभा क्षेत्र बनाने के लिए संघर्ष करें, ताकि आने वाले समय में इस इलाके के लोगों को उनका अधिकार मिल सके।
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इसके साथ ही उन्होंने हदबंदी आयोग के सदस्यों से भी अपील करते हुए कहा कि वह इस पूरे इलाके में जाकर लोगों की राय लें और उसके बाद ही कोई फैसला करें, ताकि इस दूरदराज पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को शहरी क्षेत्र का विधायक चुनकर फिर पांच वर्ष के लिए बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर उनके आगे गिड़गिड़ाना न पडे़। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर के गुरेज एरिया में 14 हजार मतदाता होने पर उसे विधानसभा क्षेत्र बनाया जा सकता है, तो इस पहाड़ी क्षेत्र में 40 हजार से ज्यादा वोटर होने पर इसे अलग विधानसभा क्षेत्र का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। इस मौके पर स्थानीय नेता सुरजीत सिंह तथा कई पंच-सरपंचों ने विचार रखे।
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