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Udhampur News: पत्नी के दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के दावे निराधार, पति व परिवार दोषमुक्त

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Udhampur, Special Mobile Magistrate, Court Verdict
उधमपुर। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने एक परिवार को दहेज उत्पीड़न के आरोपों से शनिवार को बरी कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से पति और उसके परिवार के सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप लगाए गए थे लेकिन जांच में विशिष्ट अपराध के विवरण के अभाव के कारण सभी आरोप निराधार पाए गए।
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अभियुक्त गौतम आनंद व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी संख्या 5/2025 पुलिस स्टेशन उधमपुर में धारा 85 बीएनएस के अंतर्गत अपराधों के संबंध में दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता जानवी ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का आरोप लगाया था। उसने बताया था कि उसे पर्याप्त दहेज कार, सोना, फर्नीचर और 20,00,000 रुपये की नकदी न लाने के लिए ताना मारा जाता था। उसने अपने पति पर अवैध संबंध रखने और शारीरिक व भावनात्मक शोषण का आरोप भी लगाया। उसने दावा किया था कि दहेज की मांग पूरी न करने पर उसे ससुराल से निकाल दिया गया और पुलिस में की गई शिकायतों पर शुरू में कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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बचाव पक्ष का तर्क था कि शिकायतकर्ता के दावे अस्पष्ट हैं और धारा 85 बीएनएस के तहत अपराध के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। रिपोर्ट में शिकायतकर्ता को कीमती सामान लाने के लिए मजबूर करने हेतु क्रूरता या उत्पीड़न की कोई विशिष्ट घटना का विवरण नहीं है। अदालत ने अंतिम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का विश्लेषण किया और क्रूरता के विशिष्ट आरोपों की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कथित उत्पीड़न और शारीरिक हमले के संबंध में विशिष्ट विवरणों में अभाव पाया।
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अंत में अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि विशिष्ट आरोपों के अभाव में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप निराधार हैं और अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया। अदालत ने गौतम आनंद व अन्य को धारा 262 बीएनएसएस के तहत दोषमुक्त करार दिया और धारा 85 बीएनएस के तहत मामला खारिज करती है। अदालत का यह फैसला अभियुक्तों को दोषमुक्त करने का निर्णय धारा 85 बीएनएस के तहत आरोपों को पुष्ट करने के लिए ठोस सबूतों और विशिष्ट आरोपों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अदालत के आदेश में आरोपों, कानूनी तर्कों और उदाहरणों की गहन जांच परिलक्षित होती है। यह कथित दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के मामलों में विशिष्ट, पुष्ट दावों के महत्व पर प्रकाश डालता है और व्यापक, निराधार आरोपों के प्रति आगाह करता है जो कानूनी प्रावधानों के दुरुपयोग का कारण बन सकते हैं।
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