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Udhampur News: बाढ़-बारिश से जिले के 17 स्कूल ध्वस्त, 240 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
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उधमपुर। पंचायत सुलगार में जमींदोज हुआ सरकारी प्राइमरी स्कूल करसैल। संवाद
कक्षाएं शुरू करने से पहले शिक्षक करेंगे सुरक्षा जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले में तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने अन्य सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा के ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षतिग्रस्त स्कूलों के कारण बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न इलाकों में अब तक 17 स्कूल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं जबकि 240 स्कूल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे इन स्कूलों में कक्षाओं का संचालन मुश्किल हो गया है।
शिक्षा विभाग ने फिलहाल नौ सितंबर तक स्कूलों में कक्षाओं का संचालन रोकने का आदेश जारी किया है। हालांकि, स्कूल खुलने के बाद इन क्षतिग्रस्त इमारतों में पढ़ाई कैसे होगी, यह सवाल अभिभावकों को भी परेशान कर रहा है।
स्थानीय निवासी पूजा देवी, दीपक गुप्ता, कमलेश कुमारी, मोहनलाल वर्मा व अन्य ने कहा कि स्कूलों के क्षतिग्रस्त होने से न सिर्फ पढ़ाई की चिंता है बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी डर पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा जो स्कूल पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं उनमें तो पढ़ाई संभव नहीं है लेकिन जो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं उनमें कक्षाएं लगाना भी खतरे से खाली नहीं होगा। इसलिए शिक्षा विभाग को स्कूल खोलने से पहले बच्चों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना होगा।
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जांच के बाद ही लिया जाएगा आगे का फैसला
जिले में छह सितंबर तक हुई भारी बारिश के कारण 17 स्कूलों के ध्वस्त और 240 के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट है। विभाग ने नौ सितंबर तक कक्षाएं स्थगित की हैं। इससे पहले, आठ सितंबर को सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को स्कूल बुलाया गया है ताकि वे इमारतों की गहन जांच कर सकें और यह पता लगा सकें कि स्कूल कक्षाएं संचालित करने लायक हैं या नहीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सुरक्षा ऑडिट और वैकल्पिक इंतजाम पर जोर
मुख्य शिक्षा अधिकारी कमल किशोर बड़याल ने बताया बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है। स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट भी किया जा रहा है। ध्वस्त हो चुके स्कूलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने पर भी विचार चल रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिले में तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने अन्य सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा के ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षतिग्रस्त स्कूलों के कारण बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न इलाकों में अब तक 17 स्कूल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं जबकि 240 स्कूल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे इन स्कूलों में कक्षाओं का संचालन मुश्किल हो गया है।
शिक्षा विभाग ने फिलहाल नौ सितंबर तक स्कूलों में कक्षाओं का संचालन रोकने का आदेश जारी किया है। हालांकि, स्कूल खुलने के बाद इन क्षतिग्रस्त इमारतों में पढ़ाई कैसे होगी, यह सवाल अभिभावकों को भी परेशान कर रहा है।
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स्थानीय निवासी पूजा देवी, दीपक गुप्ता, कमलेश कुमारी, मोहनलाल वर्मा व अन्य ने कहा कि स्कूलों के क्षतिग्रस्त होने से न सिर्फ पढ़ाई की चिंता है बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी डर पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा जो स्कूल पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं उनमें तो पढ़ाई संभव नहीं है लेकिन जो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं उनमें कक्षाएं लगाना भी खतरे से खाली नहीं होगा। इसलिए शिक्षा विभाग को स्कूल खोलने से पहले बच्चों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना होगा।
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जांच के बाद ही लिया जाएगा आगे का फैसला
जिले में छह सितंबर तक हुई भारी बारिश के कारण 17 स्कूलों के ध्वस्त और 240 के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट है। विभाग ने नौ सितंबर तक कक्षाएं स्थगित की हैं। इससे पहले, आठ सितंबर को सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को स्कूल बुलाया गया है ताकि वे इमारतों की गहन जांच कर सकें और यह पता लगा सकें कि स्कूल कक्षाएं संचालित करने लायक हैं या नहीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
सुरक्षा ऑडिट और वैकल्पिक इंतजाम पर जोर
मुख्य शिक्षा अधिकारी कमल किशोर बड़याल ने बताया बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है। स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट भी किया जा रहा है। ध्वस्त हो चुके स्कूलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने पर भी विचार चल रहा है।