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दो गांवों के विवाद में रुका है सड़क का काम
ब्यूरो/अमर उजाला, किश्तवाड़
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:21 PM IST
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गोपेश्वर बाईपास मार्ग एक बारिश से ही धंसा। बीस दिन पूर्व किया था विधायक राजेंद्र भंडारी ने मार्ग का उदघाटन।
- फोटो : Amar Ujala
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दो गांवों की लड़ाई के चलते मचैल सड़क का काम रुका पड़ा है। जिला प्रशासन और मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने भी गांव मस्सू और गढ़ के लोगों को मनाने का भरसक प्रयास किया था, परंतु न तो गढ़ के लोग और ना ही मस्सू के लोग काम शुरू करवाने दे रहे हैं।
इस बीच कुछ दिन पूर्व गढ़ गांव के पास सड़क पर चल रहे काम को छोड़ मस्सू गांव के पास काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए मशीन को छोटे-छोटे हिस्से में मौके पर पहुंचाया गया। परंतु गढ़ निवासी इस काम से सख्त नाराज हैं। पंच मोहन लाल, देवराज, राजेंद्र सिंह और हेमराज का कहना है कि हम इस सड़क पर काम करने के लिए तभी देंगे, जब इस सड़क को हमारे गांव से गुजारा जाएगा। उनका कहना है कि यह सड़क हमारे खेतों से निकाली गई है।
इसे सीधे मस्सू गांव के लिए नहीं निकालने देंगे। क्योंकि हमारा गांव काफी बड़ा है। यदि सड़क को गांव के बीच से निकाला जाता है तो जिन किसानों की भूमि सड़क में जा रही है, कम से कम उनको सड़क का लाभ तो मिलेगा। मस्सू गांव के लोगों ने कहा कि इस सड़क का लाभ हमें भी मिलना चाहिए। क्योंकि मचैल यात्रा के दौरान यात्री हमारे गांव से होकर जाते थे। आगे भी यह सिलसिला बरकरार रहे। स्थानीय निवासी सचिना देवी का कहना है कि हमारे गांव के लोग केवल यही चाहते हैं कि यात्र यहां से होकर गुजरे।
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गढ़ निवासियों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों से इस सड़क का काम रुका हुआ है, इसलिए भी कि यहां के लोग पढ़े लिखे नहीं हैं। मस्सू गांव के लोग पढ़े लिखे हैं और सियासी तौर भी हमसे अधिक मजबूत हैं, हांलाकि हमारे गांव के लोग अधिक हैं मतदाता भी उनसे अधिक हैं परंतु सियासी दबाव के चलते हमारे गांव से नहीं बल्कि मस्सू गांव से सड़क को निकालने के लिए जोर दिया जा रहा है।
उनका कहना है कि जब इस सड़क की सर्वे हुई थी तब यह लोग कहां सोए थे, तभी उनके खेतों से सड़क बनाई जानी चाहिए थी, हमारे खेतों से निकाल कर उनके गांव को लाब देने के लिए हम काम नहीं होने देंगे। हमारा यह भी कहना है कि सड़क मचैल के लिए हमारे ही गांव से होकर जाए इतना हम मानते हैं कि हमारे गांव से मस्सू गांव को भी सड़क से जोड़ा जाए। पर यहां मनमानी की जा रही है।
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इस बीच कुछ दिन पूर्व गढ़ गांव के पास सड़क पर चल रहे काम को छोड़ मस्सू गांव के पास काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए मशीन को छोटे-छोटे हिस्से में मौके पर पहुंचाया गया। परंतु गढ़ निवासी इस काम से सख्त नाराज हैं। पंच मोहन लाल, देवराज, राजेंद्र सिंह और हेमराज का कहना है कि हम इस सड़क पर काम करने के लिए तभी देंगे, जब इस सड़क को हमारे गांव से गुजारा जाएगा। उनका कहना है कि यह सड़क हमारे खेतों से निकाली गई है।
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इसे सीधे मस्सू गांव के लिए नहीं निकालने देंगे। क्योंकि हमारा गांव काफी बड़ा है। यदि सड़क को गांव के बीच से निकाला जाता है तो जिन किसानों की भूमि सड़क में जा रही है, कम से कम उनको सड़क का लाभ तो मिलेगा। मस्सू गांव के लोगों ने कहा कि इस सड़क का लाभ हमें भी मिलना चाहिए। क्योंकि मचैल यात्रा के दौरान यात्री हमारे गांव से होकर जाते थे। आगे भी यह सिलसिला बरकरार रहे। स्थानीय निवासी सचिना देवी का कहना है कि हमारे गांव के लोग केवल यही चाहते हैं कि यात्र यहां से होकर गुजरे।
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गढ़ निवासियों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों से इस सड़क का काम रुका हुआ है, इसलिए भी कि यहां के लोग पढ़े लिखे नहीं हैं। मस्सू गांव के लोग पढ़े लिखे हैं और सियासी तौर भी हमसे अधिक मजबूत हैं, हांलाकि हमारे गांव के लोग अधिक हैं मतदाता भी उनसे अधिक हैं परंतु सियासी दबाव के चलते हमारे गांव से नहीं बल्कि मस्सू गांव से सड़क को निकालने के लिए जोर दिया जा रहा है।
उनका कहना है कि जब इस सड़क की सर्वे हुई थी तब यह लोग कहां सोए थे, तभी उनके खेतों से सड़क बनाई जानी चाहिए थी, हमारे खेतों से निकाल कर उनके गांव को लाब देने के लिए हम काम नहीं होने देंगे। हमारा यह भी कहना है कि सड़क मचैल के लिए हमारे ही गांव से होकर जाए इतना हम मानते हैं कि हमारे गांव से मस्सू गांव को भी सड़क से जोड़ा जाए। पर यहां मनमानी की जा रही है।