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श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन पर निकाली गई कलश यात्रा
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धमपुर के रठियान में श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन पर निकाली गई कलश यात्रा
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। शहर के साथ गलते खरूनी रठियान इलाके में रविवार को कथावाचक सुभाष शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा से पहले कलश यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न स्थानों से होकर वापस कथा स्थल पर संपन्न हुई। इसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए।
सुबह करीब 10 बजे रठियान से कलश यात्रा निकाली गई। राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर कलश यात्रा रठियान के ही प्राकृतिक जलस्रोत पर पहुंची। कलश भरने के बाद यात्रा वापस कथा स्थल पर संपन्न हो गई। इसके बाद दोपहर को कथा का आयोजन हुआ, जिसमें कथावाचक ने श्रद्धालुओं को बताया कि सभी लोग इंद्रियों के वश में हैं, और इसके जाल में फंस कर लगातार पाप किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सभी को अपने गुनाहों का भी पता नहीं चल रहा है। मानव केवल माया के पीछे भागा जा रहा है। उसको अपने अच्छे व बुरे कर्मों के बारे में पता ही नहीं चल रहा है। जिस प्रकार एक छोटा सा बीज एक दिन विशालकाय पेड़ बन जाता है। उसी प्रकार छोटा सा पाप एक दिन अनर्थ कर सकता है। इसलिए, हमेशा संतों का संग करो। संतों के संग से हमेशा जीवन जीने की सही राह मिलती है।
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उन्होंने कहा कि यह कभी सोच में नहीं लाना कि काम, क्रोध और मोह का क्षणिक आवेश क्या बिगाड़ सकता है? इनसे सदा सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, जरा सी असावधानी विनाश को शीघ्र बुला सकती है। 84 लाख योनियों के बाद जो मानव जन्म मिला है, इसे ही अंतिम जन्म समझना चाहिए, और अपने परमात्मा की भक्ति करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए।
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सुबह करीब 10 बजे रठियान से कलश यात्रा निकाली गई। राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर कलश यात्रा रठियान के ही प्राकृतिक जलस्रोत पर पहुंची। कलश भरने के बाद यात्रा वापस कथा स्थल पर संपन्न हो गई। इसके बाद दोपहर को कथा का आयोजन हुआ, जिसमें कथावाचक ने श्रद्धालुओं को बताया कि सभी लोग इंद्रियों के वश में हैं, और इसके जाल में फंस कर लगातार पाप किए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि सभी को अपने गुनाहों का भी पता नहीं चल रहा है। मानव केवल माया के पीछे भागा जा रहा है। उसको अपने अच्छे व बुरे कर्मों के बारे में पता ही नहीं चल रहा है। जिस प्रकार एक छोटा सा बीज एक दिन विशालकाय पेड़ बन जाता है। उसी प्रकार छोटा सा पाप एक दिन अनर्थ कर सकता है। इसलिए, हमेशा संतों का संग करो। संतों के संग से हमेशा जीवन जीने की सही राह मिलती है।
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उन्होंने कहा कि यह कभी सोच में नहीं लाना कि काम, क्रोध और मोह का क्षणिक आवेश क्या बिगाड़ सकता है? इनसे सदा सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, जरा सी असावधानी विनाश को शीघ्र बुला सकती है। 84 लाख योनियों के बाद जो मानव जन्म मिला है, इसे ही अंतिम जन्म समझना चाहिए, और अपने परमात्मा की भक्ति करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए।

उधमपुर के रठियान में श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन पर निकाली गई कलश यात्रा- फोटो : UDHAMPUR