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Udhampur News: कलाड़ी को स्वरोजगार का साधन बनाकर बनीं आत्मनिर्भर
Mon, 16 Jun 2025 01:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:36 AM IST
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सरकारी कार्यक्रम में स्पेशल कलाडी कुलचा बनातीं सुनीता। स्रोत : संवाद
- फोटो : udhampur
सुनीता देवी इंटर पास करने के बाद कर रही थी बेरोजगारी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। तहसील बसंतगढ़ के रसली ठकराई की सुनीता देवी ने कलाड़ी बनाने का घरेलू स्वरोजगार शुरू कर स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया और अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार मुहैया करवा रही हैं। 22 वर्षीय सुनीता देवी इंटर पास करने के बाद बेरोजगारी का सामना कर रहीं थीं। सरकारी नौकरी के लिए कई आवेदन भी भरे, लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली।
इसके बाद वे गांव की महिला सेल्फ हेल्प के साथ जुड़ गईं और घरेलू व्यवसायों को शुरू कर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास शुरू किया। इसके लिए उन्होंने उम्मीद योजना से सरकारी मदद हासिल की और अपने पारंपरिक घरेलू उत्पाद कलाड़ी बनाने के काम को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। इससे अब वे अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहीं हैं और गांव की महिलाओं को भी रोजगार मुहैया करवा रहीं हैं।
परिवार में सबसे छोटी, घरेलू उत्पाद का व्यवसाय को बनाया रोजगार का जरिया
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुनीता कहती हैं कि वे अपने भाई बहनों में सबसे छोटी हैं अन्य सभी की शादी हो चुकी है। 12 वीं पास करने के बाद मैं भी अन्य युवाओं की तरह सरकारी नौकरी की उम्मीद में बेरोजगारी का सामना कर रहीं थीं। लेकिन बाद में सरकार के स्वरोजगार प्रोत्साहन से प्रेरित होकर खुद का घरेलू स्वरोगार शुरू किया।
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सरकार के उम्मीद हाट ने दूर की विपणन की समस्या
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की कलाड़ी को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है। लेकिन इसके बावजूद दूर दराज के गांव में इसके विपणन को लेकर काफी परेशानी है। हमारे घर में भी इसे सदियों से बनाया जाता है लेकिन मांग कम होने के कारण इसे सिर्फ खुद के लिए ही बनाते थे। बाद में उम्मीद योजना से प्रेरित होकर मैने कलाड़ी को घरेलू व्यवसाय के तौर पर अपनाया और आसपास की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। सरकार की तरफ से खोले गए उम्मीद हाट ने विपणन की समस्या को दूर करने में सहायता की। जिससे उनका यह व्यवसाय अब चल निकला है। उधमपुर से लेकर जम्मू और अन्य राज्यों तक उनकी कलाड़ी की मांग बढ़ चुकी है।
साल 2019 में की घरेलू स्वरोजगार की शुरूआत, अब मिल चुकी है खास पहचान
साल 2019 से अपना खुद का स्वरोजगार चला रहीं हैं और जिला स्तर से लेकर जम्मू, हरियाणा, पंजाब आदि अन्य राज्यों में होने वाले सरकारी व प्रदर्शनी कार्यक्रमों में भी अपने इस उत्पाद का स्वाद लोगों को चखा चुकी हैं। अब स्वरोजगार के साथ ही एक नई पहचान भी मिली है, सरकारी कार्यक्रमों में सफल उद्यमियों के तौर पर आमंत्रित किया जाता है। अन्य महिलाओं व युवतियों के लिए भी उनका यही संदेश है कि सरकार स्वरोजगार के लिए कई योजनाएं चला रहीं हैं इसलिए किसी पर आश्रित न रहकर इन योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। तहसील बसंतगढ़ के रसली ठकराई की सुनीता देवी ने कलाड़ी बनाने का घरेलू स्वरोजगार शुरू कर स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया और अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार मुहैया करवा रही हैं। 22 वर्षीय सुनीता देवी इंटर पास करने के बाद बेरोजगारी का सामना कर रहीं थीं। सरकारी नौकरी के लिए कई आवेदन भी भरे, लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली।
इसके बाद वे गांव की महिला सेल्फ हेल्प के साथ जुड़ गईं और घरेलू व्यवसायों को शुरू कर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास शुरू किया। इसके लिए उन्होंने उम्मीद योजना से सरकारी मदद हासिल की और अपने पारंपरिक घरेलू उत्पाद कलाड़ी बनाने के काम को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया। इससे अब वे अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहीं हैं और गांव की महिलाओं को भी रोजगार मुहैया करवा रहीं हैं।
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परिवार में सबसे छोटी, घरेलू उत्पाद का व्यवसाय को बनाया रोजगार का जरिया
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुनीता कहती हैं कि वे अपने भाई बहनों में सबसे छोटी हैं अन्य सभी की शादी हो चुकी है। 12 वीं पास करने के बाद मैं भी अन्य युवाओं की तरह सरकारी नौकरी की उम्मीद में बेरोजगारी का सामना कर रहीं थीं। लेकिन बाद में सरकार के स्वरोजगार प्रोत्साहन से प्रेरित होकर खुद का घरेलू स्वरोगार शुरू किया।
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सरकार के उम्मीद हाट ने दूर की विपणन की समस्या
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की कलाड़ी को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है। लेकिन इसके बावजूद दूर दराज के गांव में इसके विपणन को लेकर काफी परेशानी है। हमारे घर में भी इसे सदियों से बनाया जाता है लेकिन मांग कम होने के कारण इसे सिर्फ खुद के लिए ही बनाते थे। बाद में उम्मीद योजना से प्रेरित होकर मैने कलाड़ी को घरेलू व्यवसाय के तौर पर अपनाया और आसपास की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। सरकार की तरफ से खोले गए उम्मीद हाट ने विपणन की समस्या को दूर करने में सहायता की। जिससे उनका यह व्यवसाय अब चल निकला है। उधमपुर से लेकर जम्मू और अन्य राज्यों तक उनकी कलाड़ी की मांग बढ़ चुकी है।
साल 2019 में की घरेलू स्वरोजगार की शुरूआत, अब मिल चुकी है खास पहचान
साल 2019 से अपना खुद का स्वरोजगार चला रहीं हैं और जिला स्तर से लेकर जम्मू, हरियाणा, पंजाब आदि अन्य राज्यों में होने वाले सरकारी व प्रदर्शनी कार्यक्रमों में भी अपने इस उत्पाद का स्वाद लोगों को चखा चुकी हैं। अब स्वरोजगार के साथ ही एक नई पहचान भी मिली है, सरकारी कार्यक्रमों में सफल उद्यमियों के तौर पर आमंत्रित किया जाता है। अन्य महिलाओं व युवतियों के लिए भी उनका यही संदेश है कि सरकार स्वरोजगार के लिए कई योजनाएं चला रहीं हैं इसलिए किसी पर आश्रित न रहकर इन योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनें।