{"_id":"6227a2ad0e65a127671e06fc","slug":"russia-ukraine-war-udhampur-news-jmu255340994","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोलीबारी के बीच मेट्रो स्टेशन में गुजारीं दो रातें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोलीबारी के बीच मेट्रो स्टेशन में गुजारीं दो रातें
विज्ञापन
उधमपुर में यूक्रेन से लौटे उदारक को मिठाई खिलाते परिवार के सदस्य
- फोटो : UDHAMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर। यूक्रेन के खारकीव से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा उधमपुर के मुखर्जी बाजार में रहने वाला उदारक जंडियाल मंगलवार को सुरक्षित घर आ गया है। उसके घर पहुंचने पर परिवार ने मिठाई खिलाकर जश्न मनाया, और उदारक की चुनौती भरी यात्रा का हाल जाना।
उदारक ने बताया कि खारकीव में उसकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। दो महीने के बाद फाइनल परीक्षा होनी थी, और परिणाम घोषित होते ही उसे डॉक्टर बन जाना था। लेकिन, उससे पहले ही युद्ध शुरू हो गया। युद्ध शुरू होने से पहले उसने वापस लौटने के लिए टिकट बुक करवा दी थी। उसकी फ्लाइट 28 फरवरी की थी। लेकिन, 24 फरवरी को युद्ध शुरू हो गया, जिससे लौटने की उम्मीद पर पानी फिर गया।
उसने बताया कि जब खारकीव में गोलाबारी होती तो वह अपने दोस्तों के साथ मेट्रो स्टेशन में चला जाता। गोलीबारी रुकने के बाद वह अपने घर में लौट आता था। उसने दो रातें मेट्रो स्टेशन में गुजारीं, और बाकी दिन फ्लैट के नीचे बनाए बंकर में गुजारे। 28 फरवरी को तीन दोस्तों के साथ वह पोलैंड के लिए निकल पड़ा। खारकीव से 24 घंटे से अधिक का सफर तय कर वह लीविव पहुंचा, और वहां से पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचा।
विज्ञापन
करीब पांच घंटे इंतजार करने के बाद उदारक को पोलैंड में प्रवेश की अनुमति मिल गई। पोलैंड में भारत सरकार ने खाने, पीने व रहने की व्यवस्था की थी। वहां पहुंचने पर उसने खुद को सुरक्षित महसूस किया। फिर सरकार की मदद से सुरक्षित घर आया। मंगलवार को उधमपुर पहुंचे उदारक का उसके परिवार ने जोरदार स्वागत किया। वह माता-पिता और बहनों के चेहरों पर खुशी देखने के बाद सारी परेशानी भूल गया। उसको अब अपनी डिग्री को लेकर चिंता है।
विज्ञापन
उदारक ने बताया कि खारकीव में उसकी पढ़ाई का अंतिम वर्ष था। दो महीने के बाद फाइनल परीक्षा होनी थी, और परिणाम घोषित होते ही उसे डॉक्टर बन जाना था। लेकिन, उससे पहले ही युद्ध शुरू हो गया। युद्ध शुरू होने से पहले उसने वापस लौटने के लिए टिकट बुक करवा दी थी। उसकी फ्लाइट 28 फरवरी की थी। लेकिन, 24 फरवरी को युद्ध शुरू हो गया, जिससे लौटने की उम्मीद पर पानी फिर गया।
विज्ञापन
उसने बताया कि जब खारकीव में गोलाबारी होती तो वह अपने दोस्तों के साथ मेट्रो स्टेशन में चला जाता। गोलीबारी रुकने के बाद वह अपने घर में लौट आता था। उसने दो रातें मेट्रो स्टेशन में गुजारीं, और बाकी दिन फ्लैट के नीचे बनाए बंकर में गुजारे। 28 फरवरी को तीन दोस्तों के साथ वह पोलैंड के लिए निकल पड़ा। खारकीव से 24 घंटे से अधिक का सफर तय कर वह लीविव पहुंचा, और वहां से पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचा।
विज्ञापन
करीब पांच घंटे इंतजार करने के बाद उदारक को पोलैंड में प्रवेश की अनुमति मिल गई। पोलैंड में भारत सरकार ने खाने, पीने व रहने की व्यवस्था की थी। वहां पहुंचने पर उसने खुद को सुरक्षित महसूस किया। फिर सरकार की मदद से सुरक्षित घर आया। मंगलवार को उधमपुर पहुंचे उदारक का उसके परिवार ने जोरदार स्वागत किया। वह माता-पिता और बहनों के चेहरों पर खुशी देखने के बाद सारी परेशानी भूल गया। उसको अब अपनी डिग्री को लेकर चिंता है।