{"_id":"62bf3d6ee4bbdb4f676b0ca9","slug":"protest-udhampur-news-jmu26309667","type":"story","status":"publish","title_hn":"मांगें पूरी न होने तक जताते रहेंगे रोष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मांगें पूरी न होने तक जताते रहेंगे रोष
विज्ञापन
उधमपुर: अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए पीएचई कर्मचारी.
- फोटो : UDHAMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर। जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने लगातार 10वें दिन हड़ताल जारी रखी। इस दौरान उन्होंने विभाग और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, इसी तरह से विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।
दोपहर करीब एक बजे अस्थायी कर्मचारियों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण उनका भविष्य खराब होने की कगार पर है। 10 दिन से पूरे संभाग में अस्थायी कर्मचारी रोष प्रकट कर रहे हैं। लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
उन्होंने कहा कि हजारों अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने को लेकर सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई है। वहीं, करीब पांच वर्ष का वेतन भी रोक कर रखा है। काम करवाने के बाद भी पैसे न देना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। कर्मचारी लोगों से उधार लेकर परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। उनके लिए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम भी लागू नहीं किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दोपहर करीब एक बजे अस्थायी कर्मचारियों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण उनका भविष्य खराब होने की कगार पर है। 10 दिन से पूरे संभाग में अस्थायी कर्मचारी रोष प्रकट कर रहे हैं। लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हजारों अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने को लेकर सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई है। वहीं, करीब पांच वर्ष का वेतन भी रोक कर रखा है। काम करवाने के बाद भी पैसे न देना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। कर्मचारी लोगों से उधार लेकर परिवार की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। उनके लिए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम भी लागू नहीं किया है।
विज्ञापन