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लंबित मांगों के समर्थन में जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों की कामछोड़ हड़ताल जारी
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उधमपुर। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से जिले के शहर व ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को पानी का इंतजाम करने के लिए हर रोज मशक्कत करनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि सरकार को अब तो हड़ताल को खत्म करने के लिए प्रयास करने चाहिए।
शनिवार को अस्थायी कर्मचारियों की हडताल का 29वां दिन था। कर्मचारियों ने पीएचई स्टेशन पर प्रदर्शन नहीं किया। इनके काम न करने के कारण शहर व ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या बढ़ती जा रही है। शहर के भारत नगर, जखैनी, रठियान, दंदियाल व अन्य कई इलाकों में लोगों को सप्ताह में एक या फिर दो दिन ही पानी की सप्लाई मिल रही है। इसके साथ पंचैरी, मोंगरी, रामनगर, चिनैनी में भी पानी की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित है।
हर रोज लोग पानी के लिए मशक्कत कर रहे है। पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए बावली व अन्य प्राकृतिक जल स्रोत पर जाना पड़ रहा है। शाम लाल, मनमोहन सिंह, केवल कुमार व अन्य लोगों का कहना था कि अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल लगातार बढ़ती जा रही है। हड़ताल को चलते हुए करीब एक महीना हो गया है। न तो सरकार झुक रही है और न ही कर्मचारी झुकने को तैयार है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी के लिए लिए पानी का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। उनकी मांग है कि सरकार की तरफ से अब तो हड़ताल को बंद करने के लिए प्रयास किए जाएं।
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शनिवार को अस्थायी कर्मचारियों की हडताल का 29वां दिन था। कर्मचारियों ने पीएचई स्टेशन पर प्रदर्शन नहीं किया। इनके काम न करने के कारण शहर व ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत की समस्या बढ़ती जा रही है। शहर के भारत नगर, जखैनी, रठियान, दंदियाल व अन्य कई इलाकों में लोगों को सप्ताह में एक या फिर दो दिन ही पानी की सप्लाई मिल रही है। इसके साथ पंचैरी, मोंगरी, रामनगर, चिनैनी में भी पानी की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित है।
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हर रोज लोग पानी के लिए मशक्कत कर रहे है। पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए बावली व अन्य प्राकृतिक जल स्रोत पर जाना पड़ रहा है। शाम लाल, मनमोहन सिंह, केवल कुमार व अन्य लोगों का कहना था कि अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल लगातार बढ़ती जा रही है। हड़ताल को चलते हुए करीब एक महीना हो गया है। न तो सरकार झुक रही है और न ही कर्मचारी झुकने को तैयार है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आम आदमी के लिए लिए पानी का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। उनकी मांग है कि सरकार की तरफ से अब तो हड़ताल को बंद करने के लिए प्रयास किए जाएं।
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