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अलंकरण समारोह : बहादुर जवानों और सैन्य यूनिटों को मिले पदक
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:58 AM IST
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सेना के उत्तरी कमान हेड क्वार्टर में अलंकरण समारोह के दौैरान बहादुरी का परचम लहराने वाले जवानों और सैन्य यूनिटों को पदकों से नवाजा गया।
उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने उत्तरी कमान में कार्यरत तीन जवानों को मरणोपरांत सेना मेडल, 19 गेलेंटरी सेना मेडल, दस उत्कृष्ट सेवा सेना मेडल, नौ विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किए। उत्तरी कमान की 29 यूनिटों को भी बेहतर प्रशासनिक व सेवा कार्य करने के लिए यूनिट प्रशंसा पत्र प्रदान किया।
सेना कमांडर ने इस दौरान सभी जवानों, पूर्व सैनिकों, सिविलियन को अलंकरण समारोह पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सेना देश की सेवा के लिए तत्पर है। राहत कार्य किए जा रहे हैं।
साल के पहले महीने में 12 आतंकियों को मार गिराया गया। जीओसी इन सी लेफ्टिनेेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि सेना ने आतंकियों के टाप कमांडरों का सफाया कर दिया है। सेना पर हमले के लिए आतंकी तैयार रहते हैं। उनके खिलाफ आपरेशन जारी है।
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ब्रिगेडियर, जेसीओ को आतंकवाद और सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करने के आदेश दिए हैं। आपरेशन सद्भावना के तहत सेना आम नागरिक में विश्वास बहाल करने का प्रयास कर रही है।
कई स्कूलों में कार्यक्रम किए गए और बच्चों को सामान भी बांटा गया है। सेना के आपरेशन सद्भावना से लोग काफी प्रभावित हुए हैं और सेना के साथ तालमेल कर रहे हैं। सड़क हादसा हो या फिर आपादा सेना हरसंभव सहयोग करती है।
बाढ़ के दौरान सेना ने सराहनीय कार्य किए और हजारों लोगों की जान बचाई। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा के अलावा अलगाववादी गतिविधियों पर भी सेना नजर रखे हुए हैं।
बहादुरी के किस्सों के साथ हासिल किए मेडल
अलंकरण समारोह में कहीं मां तो कहीं पत्नी ने शहादत को नमन किया। परिवार के समक्ष गर्व के साथ मेडल पाने में बहादुर सैनिक भी पीछे नहीं रहे। इस दौरान पति की बहादुरी सुनकर जवान की पत्नी भावुक हो रही थीं।
शुक्रवार को पति की शहादत और सेना के सहयोग से परिवार का हिस्सा मान रही रुबीना की यादें ताजा हो गई। हालांकि गर्व के साथ सेवा मेडल पाकर रुबीना ने दर्शा दिया कि वह बहादुुर सैनिक की पत्नी है।
उसका पति राइफल मैन मुश्ताकअहमद मीर बडगाम में कैसरमुल में 19 मई 2014 को तीन आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहादत दी थी। मुश्ताक अपनी कमांडो प्लाटून के अग्रिम सिपाही थे। छोटी टुकड़ी के साथ आतंकियों के बच निकलने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया।
आतंकियों को पास आता देखकर अन्य साथियों को पीछे किया। मुठभेेड़ हुई और अपनी शहादत देकर तीन साथियों की जान बचाई।
मेडल पाने वालों में केवल आतंकवाद ही नहीं बाढ़ में बेहतर काम करने और लोगों की जान बचाने के लिए भी राइफल मैन मीर ओवेस अहमद ने अपनी शहादत दे दी।
भीषण बाढ़ के दौरान सांबुर काकापोर पुलवामा में रात साढ़े बारह बजे लोगों की जान बचाने के दौरान ओवेस शहीद हो गया। उसकी पत्नी सूबी जान ने सेना मेडल प्राप्त किया।
पुुंछ जिले में सिपाही बलबीर दास ने भी जबीला नाला के पास बारिश के दौैरान बह रही सेना पोस्ट में तैनात जवानों को बचाने का काम किया। अपने साथियों को जलधारा में बहने वाली पोस्ट से निकाल लिया, लेकिन अपनी शहादत दे दी।
उनकी पत्नी आशा देवी ने सेना कमांडर से मेडल हासिल किया। जबकि मेजर अरुण ने भी आतंकियों से लोहा लेते हुए दो आतंकियों को मार गिराया। उन्हें भी सेेना मेडल दिया गया। मेजर अरुण ने पूरा वृतांत बताते हुए मेडल पाने की खुशी जाहिर की।
नंगे हाथों 17 हजार फुट उच्च तुंगता को दरकिनार करते हुए राइफल मैन मकबूल अंसार तांग्से ले भी जोखिम भरे भूभाग को दरकिनार करते हुए 3 अप्रैल 2015 को हिमस्खलन से अपने साथी ग्रिवर सिंह को बचाया।
शून्यतम तापममान के बीच साथी को बचाने के लिए उसे भी सेना मेडल दिया गया। उनकी मां जैनब खातून ने मेडल प्राप्त किया। कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार सियाचिन हो या खार भारतीय सेना में ऐेसे जवानों ने गौरव बढ़ाया है।
फायरिंग रेंज को लेकर चल रहे विवाद पर जीओसी ने कहा कि नई जगह की तलाश की जा रही है। पुरानी फायरिंग रेंज के आसपास आबादी हो गई है।
मेेंढर में नई जगह तलाश कर ली गई है। हीरानगर में भी जगह तलाश की जा रही है। घाटी में भी एक बड़ी फायरिंग रेंज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ताकि जवान बेहतर प्रैक्टिस कर सकें। जिनकी जमीन ली गई हैं या सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए अतिरिक्त मुआवजा देने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। जो लोग रेंज के कारण विस्थापित होंगे, उन्हें बसाने के लिए भी नई जगह तलाश की जा रही है और मुआवजा देने का प्रस्ताव है।
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उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने उत्तरी कमान में कार्यरत तीन जवानों को मरणोपरांत सेना मेडल, 19 गेलेंटरी सेना मेडल, दस उत्कृष्ट सेवा सेना मेडल, नौ विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किए। उत्तरी कमान की 29 यूनिटों को भी बेहतर प्रशासनिक व सेवा कार्य करने के लिए यूनिट प्रशंसा पत्र प्रदान किया।
सेना कमांडर ने इस दौरान सभी जवानों, पूर्व सैनिकों, सिविलियन को अलंकरण समारोह पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सेना देश की सेवा के लिए तत्पर है। राहत कार्य किए जा रहे हैं।
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साल के पहले महीने में 12 आतंकियों को मार गिराया गया। जीओसी इन सी लेफ्टिनेेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि सेना ने आतंकियों के टाप कमांडरों का सफाया कर दिया है। सेना पर हमले के लिए आतंकी तैयार रहते हैं। उनके खिलाफ आपरेशन जारी है।
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ब्रिगेडियर, जेसीओ को आतंकवाद और सीमा की सुरक्षा को पुख्ता करने के आदेश दिए हैं। आपरेशन सद्भावना के तहत सेना आम नागरिक में विश्वास बहाल करने का प्रयास कर रही है।
कई स्कूलों में कार्यक्रम किए गए और बच्चों को सामान भी बांटा गया है। सेना के आपरेशन सद्भावना से लोग काफी प्रभावित हुए हैं और सेना के साथ तालमेल कर रहे हैं। सड़क हादसा हो या फिर आपादा सेना हरसंभव सहयोग करती है।
बाढ़ के दौरान सेना ने सराहनीय कार्य किए और हजारों लोगों की जान बचाई। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा के अलावा अलगाववादी गतिविधियों पर भी सेना नजर रखे हुए हैं।
बहादुरी के किस्सों के साथ हासिल किए मेडल
अलंकरण समारोह में कहीं मां तो कहीं पत्नी ने शहादत को नमन किया। परिवार के समक्ष गर्व के साथ मेडल पाने में बहादुर सैनिक भी पीछे नहीं रहे। इस दौरान पति की बहादुरी सुनकर जवान की पत्नी भावुक हो रही थीं।
शुक्रवार को पति की शहादत और सेना के सहयोग से परिवार का हिस्सा मान रही रुबीना की यादें ताजा हो गई। हालांकि गर्व के साथ सेवा मेडल पाकर रुबीना ने दर्शा दिया कि वह बहादुुर सैनिक की पत्नी है।
उसका पति राइफल मैन मुश्ताकअहमद मीर बडगाम में कैसरमुल में 19 मई 2014 को तीन आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहादत दी थी। मुश्ताक अपनी कमांडो प्लाटून के अग्रिम सिपाही थे। छोटी टुकड़ी के साथ आतंकियों के बच निकलने वाले मार्ग को अवरुद्ध कर दिया।
आतंकियों को पास आता देखकर अन्य साथियों को पीछे किया। मुठभेेड़ हुई और अपनी शहादत देकर तीन साथियों की जान बचाई।
मेडल पाने वालों में केवल आतंकवाद ही नहीं बाढ़ में बेहतर काम करने और लोगों की जान बचाने के लिए भी राइफल मैन मीर ओवेस अहमद ने अपनी शहादत दे दी।
भीषण बाढ़ के दौरान सांबुर काकापोर पुलवामा में रात साढ़े बारह बजे लोगों की जान बचाने के दौरान ओवेस शहीद हो गया। उसकी पत्नी सूबी जान ने सेना मेडल प्राप्त किया।
पुुंछ जिले में सिपाही बलबीर दास ने भी जबीला नाला के पास बारिश के दौैरान बह रही सेना पोस्ट में तैनात जवानों को बचाने का काम किया। अपने साथियों को जलधारा में बहने वाली पोस्ट से निकाल लिया, लेकिन अपनी शहादत दे दी।
उनकी पत्नी आशा देवी ने सेना कमांडर से मेडल हासिल किया। जबकि मेजर अरुण ने भी आतंकियों से लोहा लेते हुए दो आतंकियों को मार गिराया। उन्हें भी सेेना मेडल दिया गया। मेजर अरुण ने पूरा वृतांत बताते हुए मेडल पाने की खुशी जाहिर की।
नंगे हाथों 17 हजार फुट उच्च तुंगता को दरकिनार करते हुए राइफल मैन मकबूल अंसार तांग्से ले भी जोखिम भरे भूभाग को दरकिनार करते हुए 3 अप्रैल 2015 को हिमस्खलन से अपने साथी ग्रिवर सिंह को बचाया।
शून्यतम तापममान के बीच साथी को बचाने के लिए उसे भी सेना मेडल दिया गया। उनकी मां जैनब खातून ने मेडल प्राप्त किया। कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार सियाचिन हो या खार भारतीय सेना में ऐेसे जवानों ने गौरव बढ़ाया है।
फायरिंग रेंज को लेकर चल रहे विवाद पर जीओसी ने कहा कि नई जगह की तलाश की जा रही है। पुरानी फायरिंग रेंज के आसपास आबादी हो गई है।
मेेंढर में नई जगह तलाश कर ली गई है। हीरानगर में भी जगह तलाश की जा रही है। घाटी में भी एक बड़ी फायरिंग रेंज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
ताकि जवान बेहतर प्रैक्टिस कर सकें। जिनकी जमीन ली गई हैं या सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए अतिरिक्त मुआवजा देने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। जो लोग रेंज के कारण विस्थापित होंगे, उन्हें बसाने के लिए भी नई जगह तलाश की जा रही है और मुआवजा देने का प्रस्ताव है।