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जनकल्याण के रास्ते पर चलते हुए व्यतीत करें जीवन
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havan
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। अखिल भारतीय गायत्री परिवार की ओर से नगर के रामकला मंदिर में जारी चार दिवसीय 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा शुक्रवार को भी जारी रही। तीसरे दिन इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
प्रज्ञा पुराण कथा में वक्ताओं ने विभिन्न पौराणिक कथाओं के वृत्तांत सुनाकर श्रद्धालुओं के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं को शांत किया, और उन्हें सत्कर्म और जनकल्याण के रास्ते पर चलते हुए प्रभु भक्ति के कार्य करते हुए जीवन व्यतीत करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि बिना धर्म और संस्कार के मनुष्य योनि व्यर्थ है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को मनुष्य योनि में आने का अवसर मिलता है, जहां जीव अपने तन और मन से सत्कर्म करते हुए ईश्वर को प्राप्त करने का सामर्थ्य प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि में आकर सब कुछ जानते हुए भी अगर मनुष्य अज्ञानता की भंवर में गोता लगाता रहे तो उसका जीवन बेकार है। इसलिए, हमेशा सत्कर्म के मार्ग पर चलते हुए ईश्वर का स्मरण करते रहें। आयोजक समिति के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को चार दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम का समापन होगा। इस मौके पर हरिद्वार के शांतिकुंज से आई विशेष टोली हवन करेगी। इसकी पूर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश व दुनिया में शांति की प्रार्थना करना है। इसे देश विदेश के विभिन्न कोनों में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वह इस कार्यक्रम में भाग लें।
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प्रज्ञा पुराण कथा में वक्ताओं ने विभिन्न पौराणिक कथाओं के वृत्तांत सुनाकर श्रद्धालुओं के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं को शांत किया, और उन्हें सत्कर्म और जनकल्याण के रास्ते पर चलते हुए प्रभु भक्ति के कार्य करते हुए जीवन व्यतीत करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि बिना धर्म और संस्कार के मनुष्य योनि व्यर्थ है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद जीव को मनुष्य योनि में आने का अवसर मिलता है, जहां जीव अपने तन और मन से सत्कर्म करते हुए ईश्वर को प्राप्त करने का सामर्थ्य प्राप्त करता है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि में आकर सब कुछ जानते हुए भी अगर मनुष्य अज्ञानता की भंवर में गोता लगाता रहे तो उसका जीवन बेकार है। इसलिए, हमेशा सत्कर्म के मार्ग पर चलते हुए ईश्वर का स्मरण करते रहें। आयोजक समिति के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को चार दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम का समापन होगा। इस मौके पर हरिद्वार के शांतिकुंज से आई विशेष टोली हवन करेगी। इसकी पूर्णाहुति के बाद भंडारे का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश व दुनिया में शांति की प्रार्थना करना है। इसे देश विदेश के विभिन्न कोनों में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वह इस कार्यक्रम में भाग लें।
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