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Udhampur News: ऐतिहासिक चौगान मैदान में कारीगरों और प्रशिक्षुओं ने कला का जीवंत प्रदर्शन किया
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किश्तवाड़। हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग की पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का शुभारंभ ऐतिहासिक चौगान मैदान में सोमवार को हुआ। प्रदर्शनी की थीम आइए खोजें-स्थानीय उत्पाद आपका इंतजार कर रहे हैं, आपकी खरीद से विरासत जीवित रहती है रखी गई है।
प्रदर्शनी में स्थानीय कारीगरों और प्रशिक्षुओं ने कला का जीवंत प्रदर्शन किया। इसमें बुनाई, गेहूं के तिनकों से बनी कला, क्रोशिया एवं बुनाई कार्य, क्रूएल और सोजनी कढ़ाई, सिलाई-कढ़ाई तथा मिट्टी के बर्तन प्रमुख आकर्षण रहे। आगंतुकों को पारंपरिक तकनीकों को नजदीक से देखने का अवसर मिला।
इससे पहले उद्घाटन उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में किया। केडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैसर भवानी विशिष्ट अतिथि और एसीडी मनोज कुमार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्टाल के निरीक्षण के साथ हुई। इसके बाद हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग के सहायक निदेशक प्रदीप शान ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
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उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने विभाग के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आरएंडआर योजना के तहत दिए गए प्रशिक्षण और टूलकिट का सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहा है। उन्होंने डोडा के कारीगरों की भागीदारी को सराहते हुए कहा कि इससे आपसी सीख और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
यह भी कहा कि जिले के जूट, ऊन और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद गुणवत्ता में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कारीगरों को बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जिला रोजगार एवं परामर्श केंद्र तथा मिशन युवा जैसी योजनाएं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न केंद्रों साउंदर, लोहरना, भागना, लोपारा, त्रिगाम, कांदनी, अगराल, गल्हार-भाट्टा और पडयारना के प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों को विभागीय पंजीकरण कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा जय श्रीपाल कटिंग एंड टेलरिंग हैंडलूम इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव, बेरा भट्टा को पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। पारंपरिक कला को बढ़ावा देने वाले कारीगरों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर 100 दिन नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत जागरूकता सत्र भी लगाया गया
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प्रदर्शनी में स्थानीय कारीगरों और प्रशिक्षुओं ने कला का जीवंत प्रदर्शन किया। इसमें बुनाई, गेहूं के तिनकों से बनी कला, क्रोशिया एवं बुनाई कार्य, क्रूएल और सोजनी कढ़ाई, सिलाई-कढ़ाई तथा मिट्टी के बर्तन प्रमुख आकर्षण रहे। आगंतुकों को पारंपरिक तकनीकों को नजदीक से देखने का अवसर मिला।
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इससे पहले उद्घाटन उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में किया। केडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैसर भवानी विशिष्ट अतिथि और एसीडी मनोज कुमार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्टाल के निरीक्षण के साथ हुई। इसके बाद हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग के सहायक निदेशक प्रदीप शान ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
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उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने विभाग के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आरएंडआर योजना के तहत दिए गए प्रशिक्षण और टूलकिट का सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहा है। उन्होंने डोडा के कारीगरों की भागीदारी को सराहते हुए कहा कि इससे आपसी सीख और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
यह भी कहा कि जिले के जूट, ऊन और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद गुणवत्ता में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कारीगरों को बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जिला रोजगार एवं परामर्श केंद्र तथा मिशन युवा जैसी योजनाएं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना सकती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न केंद्रों साउंदर, लोहरना, भागना, लोपारा, त्रिगाम, कांदनी, अगराल, गल्हार-भाट्टा और पडयारना के प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों को विभागीय पंजीकरण कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा जय श्रीपाल कटिंग एंड टेलरिंग हैंडलूम इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव, बेरा भट्टा को पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। पारंपरिक कला को बढ़ावा देने वाले कारीगरों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर 100 दिन नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत जागरूकता सत्र भी लगाया गया