{"_id":"689117512c429828a5043982","slug":"katra-bhagwat-katha-mp-jugal-kishore-katra-news-c-309-1-sjam1002-102201-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udhampur News: देवी भागवत कथा में पहुंचे सांसद और विधायक, टेका माथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udhampur News: देवी भागवत कथा में पहुंचे सांसद और विधायक, टेका माथा
विज्ञापन
भागवत कथा में पहुंचे विधायक व सांसद।
संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। धर्मनगरी के आध्यात्मिक केंद्र में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा समारोह में सोमवार को विधायक बलदेव राज शर्मा के साथ सांसद जुगल किशोर भी पहुंचे। दोनों ने माथा भी टेका। यह कथा जयपुर से आए एक परिवार की ओर से करवाई जा रही है।
श्री वृंदावन धाम के तराश मंदिर से पहुंचे कथा वाचक पुरुषोत्तम शरण महाराज ने बताया कि देवी भागवत पुराण जिसे देवी भागवतम, भागवत पुराण, श्रीमद् भागवतम और श्रीमद् देवी भागवतम के नाम से भी जाना जाता है। देवी भगवती आदिशक्ति दुर्गा जी को समर्पित एक संस्कृत पाठ है और हिंदू धर्म के अठारह प्रमुख महापुराणों में से एक है। ये महर्षि वेद व्यास जी द्वारा रचित है। इस पाठ को देवी उपासकों और शाक्त संप्रदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह महापुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पांचों लक्षणों से पूर्ण हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कटड़ा। धर्मनगरी के आध्यात्मिक केंद्र में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा समारोह में सोमवार को विधायक बलदेव राज शर्मा के साथ सांसद जुगल किशोर भी पहुंचे। दोनों ने माथा भी टेका। यह कथा जयपुर से आए एक परिवार की ओर से करवाई जा रही है।
श्री वृंदावन धाम के तराश मंदिर से पहुंचे कथा वाचक पुरुषोत्तम शरण महाराज ने बताया कि देवी भागवत पुराण जिसे देवी भागवतम, भागवत पुराण, श्रीमद् भागवतम और श्रीमद् देवी भागवतम के नाम से भी जाना जाता है। देवी भगवती आदिशक्ति दुर्गा जी को समर्पित एक संस्कृत पाठ है और हिंदू धर्म के अठारह प्रमुख महापुराणों में से एक है। ये महर्षि वेद व्यास जी द्वारा रचित है। इस पाठ को देवी उपासकों और शाक्त संप्रदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
विज्ञापन
यह महापुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पांचों लक्षणों से पूर्ण हैं।
विज्ञापन