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Udhampur News: फूल गोभी के दाम लागत से भी कम मिल रहे, किसान नष्ट करने पर मजबूर
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गोभी का फसल नष्ट करता किसान।
- फोटो : udhampur news
उधमपुर। फूल गोभी के दाम लागत से भी कम मिलने पर किसान परेशान हैं। किसान गोभी की फसल नष्ट करने को मजबूर हैं। एक किलो गोभी को तैयार करने में किसानों का अपना खर्चा 15 रुपये आता है, जबकि उन्हें मौजूदा समय में मंडी में 8 रुपये से लेकर 10 रुपये किलो दाम मिल रहा है।
जिला उधमपुर का चिनैनी क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। इस क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि अगर इतनी मेहनत करके भी जेब से पैसे जा रहे हैं तो उसे बेचने का क्या फायदा। इससे अच्छा है कि वह लोग बाजार जाकर सब्जी बेचने से अच्छा है उसी सब्जी से खेतों में खाद्य तैयार कर अगली फसल के लिए काम में लाएंगे।
मंडी में श्रीनगर से आ रही है गोभी
जहां एक तरफ बाजारों में श्रीनगर से काफी अधिक मात्रा में गोभी आ रही है। यह गोभी मंडी में 15 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसके चलते चिनैनी की देसी गोभी को सही दाम नहीं मिल पा रहा है, जबकि बाजार में 25 से 30 रुपये किलो गोभी बिक रही है।
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किसान शंकर चंद का कहना है कि हम लोग दिन रात एक कर सब्जियां तैयार करते हैं। अगर सब्जी को बेच कर उनकी लागत भी न निकल पाए तो ऐसे में सब्जी को बेचने से अच्छा है उसे खुद ही खेतों में नष्ट कर खाद्य तैयार कर ली जाए।
करनजीत सिंह का कहना है कि जहां सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई प्रकार की सरकारी योजनाओं को चलाकर किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ ही कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात करती है। लेकिन किसानों के लिए सरकार की ओर से सब्जियों के सही दाम भी दिए जाने चाहिएं ताकि कम से कम किसानों द्वारा अपनी जेब से लगाई गई लागत तो पूरी हो सके।
यशपाल का कहना है कि यह क्षेत्र सब्जियों का हब माना जाता है और यहां पर रहने वाले अधिकतर लोग खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं। लेकिन मौजूदा समय में किसानों को उनकी मेहनत का फल नहीं मिलेगा तो फिर किसान क्यों अपनी सब्जी को लेकर बाजार पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए हम सरकार से यही मांग करते हैं कि किसानों द्वारा तैयार की गई सब्जियों का उन्हें सही दाम मिल पाए, इसके लिए कदम उठाने की जरूरत है।
पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि जिस तरह से दिन व दिन महंगाई बढ़ती जा रही है। इसके चलते उन्हें एक किलो गोभी को तैयार करने में 15 रुपये की लागत आती है। बाजारों में 8 से 10 रुपये किलो दाम मिलने से उनके द्वारा जेब से खर्च कर लगाई गई लागत भी नहीं मिल पा रही है। इसके चलते तंग होकर किसान अब गोभी की फसल को खेतों में ही नष्ट कर खाद बनाने पर मजबूर हो चुके हैं।
कोट
विभाग की ओर से अगले सीजन से पहले किसानों को लागत व मांग वाली सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि उन्हें इस तरह का नुकसान दोबारा न उठाना पड़े। फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी के अधिकारियों से बात कर किसानों की सब्जियां जम्मू मंडी में पहुंचाई जाएंगी ताकि किसानों को अच्छे दाम मिल सके।
-हरबंस सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जिला उधमपुर का चिनैनी क्षेत्र कृषि का हब माना जाता है। इस क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि अगर इतनी मेहनत करके भी जेब से पैसे जा रहे हैं तो उसे बेचने का क्या फायदा। इससे अच्छा है कि वह लोग बाजार जाकर सब्जी बेचने से अच्छा है उसी सब्जी से खेतों में खाद्य तैयार कर अगली फसल के लिए काम में लाएंगे।
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मंडी में श्रीनगर से आ रही है गोभी
जहां एक तरफ बाजारों में श्रीनगर से काफी अधिक मात्रा में गोभी आ रही है। यह गोभी मंडी में 15 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसके चलते चिनैनी की देसी गोभी को सही दाम नहीं मिल पा रहा है, जबकि बाजार में 25 से 30 रुपये किलो गोभी बिक रही है।
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किसान शंकर चंद का कहना है कि हम लोग दिन रात एक कर सब्जियां तैयार करते हैं। अगर सब्जी को बेच कर उनकी लागत भी न निकल पाए तो ऐसे में सब्जी को बेचने से अच्छा है उसे खुद ही खेतों में नष्ट कर खाद्य तैयार कर ली जाए।
करनजीत सिंह का कहना है कि जहां सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई प्रकार की सरकारी योजनाओं को चलाकर किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ ही कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात करती है। लेकिन किसानों के लिए सरकार की ओर से सब्जियों के सही दाम भी दिए जाने चाहिएं ताकि कम से कम किसानों द्वारा अपनी जेब से लगाई गई लागत तो पूरी हो सके।
यशपाल का कहना है कि यह क्षेत्र सब्जियों का हब माना जाता है और यहां पर रहने वाले अधिकतर लोग खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं। लेकिन मौजूदा समय में किसानों को उनकी मेहनत का फल नहीं मिलेगा तो फिर किसान क्यों अपनी सब्जी को लेकर बाजार पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए हम सरकार से यही मांग करते हैं कि किसानों द्वारा तैयार की गई सब्जियों का उन्हें सही दाम मिल पाए, इसके लिए कदम उठाने की जरूरत है।
पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि जिस तरह से दिन व दिन महंगाई बढ़ती जा रही है। इसके चलते उन्हें एक किलो गोभी को तैयार करने में 15 रुपये की लागत आती है। बाजारों में 8 से 10 रुपये किलो दाम मिलने से उनके द्वारा जेब से खर्च कर लगाई गई लागत भी नहीं मिल पा रही है। इसके चलते तंग होकर किसान अब गोभी की फसल को खेतों में ही नष्ट कर खाद बनाने पर मजबूर हो चुके हैं।
कोट
विभाग की ओर से अगले सीजन से पहले किसानों को लागत व मांग वाली सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि उन्हें इस तरह का नुकसान दोबारा न उठाना पड़े। फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी के अधिकारियों से बात कर किसानों की सब्जियां जम्मू मंडी में पहुंचाई जाएंगी ताकि किसानों को अच्छे दाम मिल सके।
-हरबंस सिंह, जिला कृषि अधिकारी