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Udhampur News: नशा तस्कर ने अदालत में कबूला जुर्म, 6 माह की जेल और 20 हजार जुर्माना
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उधमपुर। नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में विशेष एनडीपीएस अदालत उधमपुर ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 7.41 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपी इशफाक अहमद बेग को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की साधारण कैद और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने की सूरत में आरोपी को 15 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
मामला चिनैनी पुलिस स्टेशन से जुड़ा है, जहां पुलिस ने गश्त और चेकिंग के दौरान बारामुला निवासी इशफाक अहमद बेग को गैर-कानूनी तरीके से हेरोइन कब्जे में रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत के समक्ष जुर्म कबूलने की याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि आरोपी के घर में उसकी जमानत के लिए बेल बॉन्ड भरने वाला कोई नहीं है। आरोपी ने खुद में सुधार लाने का वादा करते हुए अदालत से रहम की गुहार लगाई और भविष्य में किसी भी तरह के अपराध में शामिल न होने का हलफनामा प्रस्तुत किया। लोक अभियोजक ने आरोपी के जुर्म कबूलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने आरोपी को साफ तौर पर चेताया कि जुर्म कबूल करने के कानूनी और दंडनीय परिणाम होंगे, लेकिन इसके बावजूद आरोपी अपने इकबाल-ए-जुर्म पर अडिग रहा।
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विशेष एनडीपीएस जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि जब्त की गई हेरोइन की मात्रा मध्यम श्रेणी की है और आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। आरोपी के स्वेच्छा से किए गए इकबालिया बयान और उसकी कम उम्र व सुधार की संभावना को देखते हुए अदालत ने नरमी बरतते हुए उसे सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा जेल में पहले ही काटी जा चुकी हिरासत की अवधि को उसकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।
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मामला चिनैनी पुलिस स्टेशन से जुड़ा है, जहां पुलिस ने गश्त और चेकिंग के दौरान बारामुला निवासी इशफाक अहमद बेग को गैर-कानूनी तरीके से हेरोइन कब्जे में रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
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मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत के समक्ष जुर्म कबूलने की याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि आरोपी के घर में उसकी जमानत के लिए बेल बॉन्ड भरने वाला कोई नहीं है। आरोपी ने खुद में सुधार लाने का वादा करते हुए अदालत से रहम की गुहार लगाई और भविष्य में किसी भी तरह के अपराध में शामिल न होने का हलफनामा प्रस्तुत किया। लोक अभियोजक ने आरोपी के जुर्म कबूलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने आरोपी को साफ तौर पर चेताया कि जुर्म कबूल करने के कानूनी और दंडनीय परिणाम होंगे, लेकिन इसके बावजूद आरोपी अपने इकबाल-ए-जुर्म पर अडिग रहा।
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विशेष एनडीपीएस जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि जब्त की गई हेरोइन की मात्रा मध्यम श्रेणी की है और आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। आरोपी के स्वेच्छा से किए गए इकबालिया बयान और उसकी कम उम्र व सुधार की संभावना को देखते हुए अदालत ने नरमी बरतते हुए उसे सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा जेल में पहले ही काटी जा चुकी हिरासत की अवधि को उसकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।