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औद्योगिक क्षेत्र के स्थापित करने पर खड़े किए सवाल
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उधमपुर में प्रेस वार्ता करते एडवोकेट संजीत कुमार बवोरिया
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। अधिवक्ता संजीत कुमार बवोरिया ने रविवार को प्रेसवार्ता कर इंटीग्रेटिड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट सेंटर (आईआईडी) बट्टलबालियां को गैर कानूनी बताया। आरटीआई से पता चला है कि बट्टलबालियां के नाभिक संयंत्र को स्थापित करने के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहण की गई थी। फिर इस पर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर दिया गया।
अधिवक्ता ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मिली है कि नाभिक संयंत्र बनाने के उद्देश्य से 1986 में 1051 कनाल जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके लिए कुल 8472238.60 रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन, आज तक इस जमीन पर कोई नाभिक संयंत्र नहीं लग सका। जबकि, इस जमीन पर केमिकल, सीमेंट और कीटनाशक की फैक्ट्रियां लगा दी गई हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसके कारण 10 से अधिक पंचायतों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। 1986 में इस तरह की जमीन का मूल्य 30 हजार प्रति कनाल था। लेकिन, उस समय ग्रामीणों को तीन से साढ़े सात हजार रुपये तक मूल्य दिया गया था। इतनी अधिक जमीन का अधिग्रहण कर लोगों को कृषि से भी वंचित कर दिया गया था।
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उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से इस जमीन का अधिग्रहण किया गया था, वह पूरा नहीं हुआ है। लोगों को धोखे में रख कर इसका अधिग्रहण किया गया है। केमिकल व सीमेंट फैक्ट्रियों से लगातार लोगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसलिए सरकार इसको लेकर कुछ जरूरी कदम उठाए।
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अधिवक्ता ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मिली है कि नाभिक संयंत्र बनाने के उद्देश्य से 1986 में 1051 कनाल जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके लिए कुल 8472238.60 रुपये का भुगतान किया गया था। लेकिन, आज तक इस जमीन पर कोई नाभिक संयंत्र नहीं लग सका। जबकि, इस जमीन पर केमिकल, सीमेंट और कीटनाशक की फैक्ट्रियां लगा दी गई हैं।
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उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसके कारण 10 से अधिक पंचायतों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। 1986 में इस तरह की जमीन का मूल्य 30 हजार प्रति कनाल था। लेकिन, उस समय ग्रामीणों को तीन से साढ़े सात हजार रुपये तक मूल्य दिया गया था। इतनी अधिक जमीन का अधिग्रहण कर लोगों को कृषि से भी वंचित कर दिया गया था।
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उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से इस जमीन का अधिग्रहण किया गया था, वह पूरा नहीं हुआ है। लोगों को धोखे में रख कर इसका अधिग्रहण किया गया है। केमिकल व सीमेंट फैक्ट्रियों से लगातार लोगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसलिए सरकार इसको लेकर कुछ जरूरी कदम उठाए।