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बिजली, सड़क, स्कूल को तरस रहे ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला,उधमपुर
Updated Thu, 11 Dec 2014 01:06 AM IST
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वम्मां गांव: दीये की टिमटिमाहट में पढ़ते हैं बच्चे, कई किलोमीटर चलकर जाते हैं स्कूल जिले के कई गांव आज भी ऐसे हैं, जहां मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। ऐसा ही एक गांव है वम्मां। जिला मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर की दूरी पर बसा यह गांव आज तक सड़क मार्ग से महरूम है।
गांव में न तो बिजली की कोई व्यवस्था है न पेयजल की। यहां तक कि बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल तक की व्यवस्था इस गांव में नहीं हो पाई है। इसके चलते बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर गांव से बाहर जाना पड़ता है, जिससे उनका लगभग पूरा दिन ही स्कूल आने और जाने में बीत जाता है।
गांव में बिजली नहीं होने के कारण रात को दीये और लालटेन के सहारे ही बच्चों को पढ़ना पड़ता है। इसके लिए गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन सिवाय आश्वासनों के उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। पंच शशिबाला, रहमदीन, अतरदीन, शुकरदीन, जगदीश दत्त, गिरधारी लाल, शकून शर्मा आदि ने बताया कि पंचायत धनू के अंतर्गत पड़ते इस गांव में अभी तक विकास के नाम पर कोई भी काम नहीं हुआ है।
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सरकारी उपेक्षा के चलते गांव में अभी तक न तो बिजली की पहुंच हुई है और न ही पानी और शिक्षा के लिए स्कूल ही खोले गये है। इसके साथ ही सड़क मार्ग नहीं होने के कारण गांव के लोग आज भी गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर पैदल पंचायत धनु से गाड़ियों का दीदार करने को मजबूर है। व गांव के छोटे- छोटे बच्चे भी शिक्षा हासिल करने के लिए भी पंचायत स्थित स्कूल पर ही निर्भर है, जिसके लिए लोगों ने सरकार से जल्द से जल्द गांव में सड़क मार्ग, बिजली और शिक्षा के लिए स्कूल खोलने की मांग की है।
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गांव में न तो बिजली की कोई व्यवस्था है न पेयजल की। यहां तक कि बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल तक की व्यवस्था इस गांव में नहीं हो पाई है। इसके चलते बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर गांव से बाहर जाना पड़ता है, जिससे उनका लगभग पूरा दिन ही स्कूल आने और जाने में बीत जाता है।
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गांव में बिजली नहीं होने के कारण रात को दीये और लालटेन के सहारे ही बच्चों को पढ़ना पड़ता है। इसके लिए गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन सिवाय आश्वासनों के उन्हें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। पंच शशिबाला, रहमदीन, अतरदीन, शुकरदीन, जगदीश दत्त, गिरधारी लाल, शकून शर्मा आदि ने बताया कि पंचायत धनू के अंतर्गत पड़ते इस गांव में अभी तक विकास के नाम पर कोई भी काम नहीं हुआ है।
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सरकारी उपेक्षा के चलते गांव में अभी तक न तो बिजली की पहुंच हुई है और न ही पानी और शिक्षा के लिए स्कूल ही खोले गये है। इसके साथ ही सड़क मार्ग नहीं होने के कारण गांव के लोग आज भी गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर पैदल पंचायत धनु से गाड़ियों का दीदार करने को मजबूर है। व गांव के छोटे- छोटे बच्चे भी शिक्षा हासिल करने के लिए भी पंचायत स्थित स्कूल पर ही निर्भर है, जिसके लिए लोगों ने सरकार से जल्द से जल्द गांव में सड़क मार्ग, बिजली और शिक्षा के लिए स्कूल खोलने की मांग की है।