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जिले के 50 स्कूलों में पांच से भी कम विद्यार्थी, शिक्षकों की भरमार
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उधमपुर। सरकार से मिले निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने कम संख्या वाले सरकारी स्कूलों की सूची तैयार कर दी है। जिले में करीब 50 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 50 से कम है लेकिन स्टाफ पर्याप्त है।
विभाग ने कुल 244 स्कूलों का चयन किया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 50 से कम है। इनकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को भेज दी गई है। अब इन स्कूलों को या तो बंद किया जाएगा, या आपस में इनका विलय किया जाएगा। इसका अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक जम्मू को लेना है। जिले में डेढ़ हजार से अधिक सरकारी प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। लेकिन, सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या सौ से भई कम है। साथ ही इनको पढ़ाने के लिए चंद शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।
इसके अलावा कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें न के बराबर विद्यार्थी हैं और शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। इसी कारण सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी बढ़ती जा रही है, और विद्यार्थियों की शिक्षा लगातार प्रभावित हो रही है। कुछ महीने पहले कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों की पहचान करने को लेकर शिक्षा निदेशक जम्मू ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे। निर्देश मिलने के बाद उधमपुर के शिक्षा विभाग ने भी काम किया और इनकी रिपोर्ट तैयार कर भेज दी है।
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तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में 244 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या कम है। किए गए सर्वे में शिक्षा विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में दस से कम, मिडिल स्कूलों में 30 से कम और हाई स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल रखे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें 50 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या पांच से भी कम है। अब इन स्कूलों का दूसरे स्कूलों में विलय करना है, या बंद करना है, इसका अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक जम्मू लेगा।
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पंचायत प्रतिनिधि स्कूलों के विलय का कर सकते हैं विरोध
शिक्षा विभाग ने सर्वे कर कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों की पहचान कर ली है। लेकिन, सरकार इन स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में करती है तो पंचायत प्रतिनिधि इसका विरोध करते हैं। अगर इन स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में होता है तो विद्यार्थियों को घर से दूर दूसरे स्कूल जाना पड़ेगा। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी होगी। इसी को लेकर पंचायत प्रतिनिधि विरोध कर सकते हैं।
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शिक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा निदेशक जम्मू को भेज दी है। इसको लेकर अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक को ही लेना है। अगर किसी स्कूल का विलय दूसरे स्कूल में होता है तो विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी दूसरे स्कूल की दूरी तय करना होगी।
- अरविन कुमार कौल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, उधमपुर
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विभाग ने कुल 244 स्कूलों का चयन किया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 50 से कम है। इनकी रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को भेज दी गई है। अब इन स्कूलों को या तो बंद किया जाएगा, या आपस में इनका विलय किया जाएगा। इसका अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक जम्मू को लेना है। जिले में डेढ़ हजार से अधिक सरकारी प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। लेकिन, सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या सौ से भई कम है। साथ ही इनको पढ़ाने के लिए चंद शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।
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इसके अलावा कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें न के बराबर विद्यार्थी हैं और शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। इसी कारण सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी बढ़ती जा रही है, और विद्यार्थियों की शिक्षा लगातार प्रभावित हो रही है। कुछ महीने पहले कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों की पहचान करने को लेकर शिक्षा निदेशक जम्मू ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे। निर्देश मिलने के बाद उधमपुर के शिक्षा विभाग ने भी काम किया और इनकी रिपोर्ट तैयार कर भेज दी है।
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तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में 244 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या कम है। किए गए सर्वे में शिक्षा विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में दस से कम, मिडिल स्कूलों में 30 से कम और हाई स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल रखे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें 50 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या पांच से भी कम है। अब इन स्कूलों का दूसरे स्कूलों में विलय करना है, या बंद करना है, इसका अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक जम्मू लेगा।
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पंचायत प्रतिनिधि स्कूलों के विलय का कर सकते हैं विरोध
शिक्षा विभाग ने सर्वे कर कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों की पहचान कर ली है। लेकिन, सरकार इन स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में करती है तो पंचायत प्रतिनिधि इसका विरोध करते हैं। अगर इन स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में होता है तो विद्यार्थियों को घर से दूर दूसरे स्कूल जाना पड़ेगा। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी होगी। इसी को लेकर पंचायत प्रतिनिधि विरोध कर सकते हैं।
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शिक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा निदेशक जम्मू को भेज दी है। इसको लेकर अंतिम निर्णय शिक्षा निदेशक को ही लेना है। अगर किसी स्कूल का विलय दूसरे स्कूल में होता है तो विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी दूसरे स्कूल की दूरी तय करना होगी।
- अरविन कुमार कौल, मुख्य शिक्षा अधिकारी, उधमपुर